
अरावली... क्या चुनौतियां और सवाल हैं सरकार के सामने, वो जवाब कहां से मिलेंगे?
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सिर्फ अरावली ही नहीं... सरकार, कोर्ट, वैज्ञानिकों और लोगों के पास चुनौतियों की पर्वतमाला खड़ी है. कई सवाल हैं, जिनके उत्तर चाहिए. कितनी ऊंचाई सही होनी चाहिए जहां तक खनन वैध हो. कितना इलाका बफर जोन में हो और कौन सा हिस्सा इकोसेंसिटिन जोन में होना चाहिए. ऐसे ही कई सवालों के जवाब हमने लिए एक्सपर्ट से...
पर्यावरण एक्टिविस्ट आरोप लग रहे हैं कि सरकार की नई परिभाषा से अरावली के बड़ा हिस्सा खनन और निर्माण के लिए खुल जाएगा. पहले जानते हैं इन सवालों और चुनौतियों को...
अब इन सवालों पर सरकार की तरफ से पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्टीकरण देने की कोशिश की, लेकिन कुछ सवालों पर उनके जवाब संतोषजनक रहे, तो कुछ पर अधूरे.
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मंत्री ने कहा कि जब तक साइंटिस्ट अपना प्लान नहीं बना लेते हैं, तब तक अरावली में कोई नई खनन लीज नहीं दी जाएगी. कुल 1.44 लाख वर्ग किमी अरावली में सिर्फ 0.19% हिस्सा ही खनन के लायक है. उसमें भी सिर्फ विशेष और वैज्ञानिक कारणों से अनुमति मिलेगी, जैसे रणनीतिक खनिज या परमाणु ऊर्जा की जरूरत. रियल एस्टेट के लिए कोई छूट नहीं. यहां मंत्री का जवाब संतोषजनक था. खनन की आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया.
नया नियम अवैध खनन रोकने और कानूनी रूप से सतत खनन की अनुमति देने के लिए हैं. ड्रोन से सख्त निगरानी होगी. यहां मंत्री का जवाब अधूरा था. अवैध खनन कैसे रोका जाएगा, इस पर सीधा जवाब नहीं दिया. इसके बजाय कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राजस्थान में पहले की सरकार ने अवैध खनन होने दिया जा रहा है.

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