
अयोध्या के महायज्ञ के बीच सोमनाथ मंदिर के 73 साल पुराने न्योते पर सियासी लड़ाई... नेहरू पर क्यों भिड़े कांग्रेस-BJP?
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कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को एक बयान में कहा कि वो 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह और राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे. कांग्रेस को राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से न्योता दिया गया था, लेकिन न्योते को अस्वीकार किए जाने से सियासत गरमा गई. बीजेपी ने सोमनाथ मंदिर कनेक्शन निकाला और कांग्रेस पर हमला बोल दिया.
अयोध्या में 22 जनवरी को नए राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम है. कांग्रेस ने इस न्योते को ठुकरा दिया है. कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, पार्टी नेता राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे. इस पर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर पर जवाहरलाल नेहरू के रुख का जिक्र किया. 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन से नेहरू के कनेक्शन पर दोनों पार्टियों के नेताओं ने वार-पलटवार किया है.
दरअसल, बुधवार को कांग्रेस ने एक बयान जारी किया और बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन को 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता मिला था. चूंकि यह बीजेपी और आरएसएस का इवेंट है और चुनावी लाभ के लिए अधूरे मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है. इसलिए कांग्रेस पार्टी न्योते को ससम्मान अस्वीकार करती है. कांग्रेस का कहना है कि हमारे देश में लाखों लोग भगवान राम की पूजा करते हैं. धर्म एक निजी मामला है. लेकिन आरएसएस / बीजेपी ने लंबे समय से अयोध्या में मंदिर को राजनीतिक प्रोजेक्ट बनाया है. अधूरे मंदिर का उद्घाटन स्पष्ट रूप से चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है. आरएसएस/बीजेपी के कार्यक्रम के निमंत्रण को सम्मानपूर्वक अस्वीकार कर दिया है.
'बीजेपी ने नेहरू का किस्सा याद दिलाया'
कांग्रेस के आधिकारिक बयान आने के बाद बीजेपी हमलावर हो गई. बीजेपी नेताओं ने गुरुवार को कांग्रेस पर 'राम विरोधी' कहकर तंज कसा और आरोप लगाया कि कैसे देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण/ उद्घाटन कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे. बीजेपी का कहना है कि नेहरू ने देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने नेहरू की अनदेखी की और सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया था.
नेहरू-सोमनाथ पर बीजेपी ने क्या कहा है...
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, कांग्रेस नकारात्मक राजनीति करती है. हर चीज का बहिष्कार कर रही है. यह गांधी (महात्मा गांधी) की नहीं, बल्कि नेहरू (जवाहरलाल नेहरू) की कांग्रेस है. सुधांशु त्रिवेदी का कहना था कि भारत का इतिहास जब-जब करवट ले रहा होता है, तब-तब कांग्रेस उस मौके के साथ खड़े ना होकर उसका बहिष्कार करती है. उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी के जमाने में कारसेवकों पर गोलियां चलीं. राजीव गांधी के जमाने और पीवी नरसिम्हा के जमाने में क्या क्या नहीं हुआ और सोनिया गांधी के दौर में राम काल्पनिक हो गए. राम मंदिर का विरोध भी उसी का हिस्सा है. बाबरी के पक्षकार भी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आ रहे हैं लेकिन कांग्रेस का विरोध किस लिए है? सुधांशु ने जवाहर लाल नेहरू का जिक्र किया और कहा, जब सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तो जवाहरलाल नेहरू जी ने 24 अप्रैल, 1951 को उस समय सौराष्ट्र के प्रमुख को पत्र लिखा था कि इस कठिन समय में इस समारोह के लिए दिल्ली से मेरा आना संभव नहीं है. मैं इस पुनरुत्थानवाद से बहुत परेशान हूं, मेरे लिए बहुत कष्टकारक है कि मेरे राष्ट्रपति, मेरे कुछ मंत्री और आप सोमनाथ के इस समारोह से जुड़े हुए हैं और मुझे लगता है कि ये मेरे देश की प्रगति के अनुरूप नहीं है, इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे.

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