
अमेरिका ने विदेशी स्टूडेंट्स के लिए बदले नियम, भारतीय छात्रों पर होगा ये असर
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इस नई अपडेटेड पॉलिसी के तहत रोजगार के लिए, स्टेटस में बदलाव, अमेरिका में रहने की अवधि में विस्तार करने और F और M श्रेणी के छात्रों के स्टेटस को बहाल करने से जुड़े आवेदनों को लेकर USCIS की भूमिका को निर्धारित किया गया है.
अमेरिका ने विशेष श्रेणी के वीजाधारकों के लिए नियमों में बदलाव किया है. ये बदलाव F और M श्रेणी के वीजाधारकों के लिए किए गए हैं. इसके तहत यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई के नई पॉलिसी जारी की है.
यह नई अपडेटेड पॉलिसी छात्रों के स्टेटस में बदलाव, अमेरिका में रहने की उनकी अवधि में विस्तार और F और M श्रेणी के छात्रों के स्टेटस को बहाल करने के आवेदन से जुड़ी हुई हैं. यह नई गाइडलाइंस 20 दिसंबर को जारी की गई थीं.
उदाहरण के लिए इन नई गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि F और M वीजाधारक छात्रों की अपने मूल देश को छोड़ने की मंशा नहीं हो. लेकिन ऐसे छात्रों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेट या इमिग्रेंट वीजा का लाभ मिल सकता है.
इसके अलावा इन गाइडलाइंस में ये भी कहा गया है कि F वीजाधारक छात्र साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमैटिक्स की अपनी डिग्री के आधार पर ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में विस्तार के लिए आवेदन कर सकते हैं.
मालूम हो कि अमेरिका में पढ़ने वाले लगभग 10 लाख विदेशी छात्रों में से 25 फीसदी से अधिक भारतीय छात्र हैं.
क्या है F और M वीजा?

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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