
अफगान मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठी दिखीं महिला पत्रकार, मुत्तकी ने पिछली बार नहीं बुलाने पर दी सफाई
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अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति, विशेष रूप से तालिबान के अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद दयनीय बनी हुई है. तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों पर सख्त पाबंदियां लगा रखी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने लैंगिक रंगभेद तक करार दिया है.
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत के दौरे पर हैं. वह भारत में लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं लेकिन इन कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को दूर रखने पर विवाद बना हुआ है. इस बीच रविवार को मुत्तकी की एक और प्रेस कॉन्फ्रेस हुई, जिसमें महिला पत्रकारों को बकायदा इनवायट किया गया. इस दौरान महिलाएं प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली कतार में बैठी नजर आईं.
मुत्तकी ने 10 अक्टूबर को अफगान एबेंसी में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें सिर्फ पुरुष पत्रकार ही शामिल हुए थे. महिला पत्रकारों को इससे दूर रखा गया था. इसके बाद से तालिबान सरकार के इस कदम की आलोचना हो रही थी. केंद्र सरकार पर भी मूक दर्शक बने रहने के आरोप लगाए जा रहे थे. महिला पत्रकारों से लेकर विपक्षी नेताओं और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे गलत बताया था.
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन वीमेन्स प्रेस कॉर्प्स ने इसे महिला पत्रकारों के लिए अत्यंत भेदभावपूर्ण बताया था. इन तमाम आलोचनाओं के बीच अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की टीम ने रविवार को एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इस बार महिला पत्रकारों को भी इनवायट किया.
महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूर रखने के विवाद पर जब मुत्तकी से पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया बल्कि यह तकनीकी मुद्दा था. उस समय समय कम था इसलिए पत्रकारों की छोटी लिस्ट बनाई गई थी. यह तकनीकी मुद्दा था. हमारे सहयोगियो ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों को ही इनवायट किया था. इसके अलावा कोई मंशा नहीं थी. समय कम था इसलिए हमने कुछ ही पत्रकारों को इनवायट किया था.
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अफगानिस्तान दूतावास की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को सक्रिय तौर पर हिस्सा लेते देखकर खुशी हुई. भारत में हम समावेशिता का उत्सव मनाते हैं. कभी भी महिलाओं को अलग या बहिष्कृत न करें.
सरकार ने मामले पर बना ली थी दूरी

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