
अपनी यात्रा से राजस्थान में कांग्रेस को कितना जोड़ पाए राहुल: दिन भर, 16 दिसंबर
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भारत जोड़ो यात्रा के ज़रिये, राजस्थान कांग्रेस को कितना जोड़ पाए राहुल गांधी? निर्भया गैंगरेप केस के दस साल बाद हालात कितने बदले, सख़्त क़ानून के बाद भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं, बिहार में भागकर शादी करने वाले कपल्स की संख्या क्यों बढ़ी और फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप पर बातचीत, सुनिए आज के 'दिन भर' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
कहते हैं यात्राएं बदलाव को आमंत्रण देती है. आपके अंदर बाहर बहुत कुछ बदल देती है. इसी बदलाव की आस में एक यात्रा कांग्रेस भी कर रही है... भारत जोड़ो यात्रा, जिसकी अगुआई राहुल गांधी कर रहे हैं. आज इस यात्रा के सौ दिन पूरे हो गए. सात सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से यात्रा की शुरुआत हुई थी, जो कई राज्यों से गुज़रती हुई अभी राजस्थान के जयपुर पहुंची है. सौ दिन पूरे होने पर आज राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया.
वहीं दूसरी ओर बीजेपी शुरुआत से लेकर अबतक यात्रा को विफल बता रही है. दीगर बात ये है कि राहुल की इस यात्रा में समाज के अलग-अलग हिस्सों के लोग शामिल हो रहे हैं. फिर चाहे वो फिल्मी जगत के लोग हों या फिर पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन. जिसके बिनाह पर कांग्रेस इसके सफल होने का दावा कर रही है. आज प्रेस कांफ्रेंस में राहुल ने इस ओर इशारा भी किया. तो इस यात्रा के ज़रिये, वह राजस्थान कांग्रेस को कितना जोड़ पाए और अपनी छाप कितना छोड़ पाए, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.
16 दिसंबर 2012 की वो काली तारीख थी, जब दिल्ली और देश निर्भया गैंगरेप से दहल उठा था. आज इस केस को 10 साल पूरे हो गए हैं. बर्बरता और हैवानियत की सारी हदें पार कर देने वाले इस केस ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था. निर्भया के समर्थन में दिल्ली की सड़कों पर हज़ारों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था...कई हफ्तों तक यह केस दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ था.. और यही मामला था जिसकी वजह से सरकार को महिलाओं के ख़िलाफ़ संगीन अपराधों को लेकर और ज़्यादा सख़्त कानून लाने के लिए मजबूर होना पड़ा.
पर अफसोस इतने साल बाद भी हज़ारों महिलाएं यौन हिंसा का शिकार हो रही हैं..और इंसाफ़ पाने लिए लड़ाइयां लड़ रही हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन दस साल में औरतों के खिलाफ़ हिंसा की दर घटने के बजाय 54 फीसदी बढ़ गई है. एनसीआरबी डेटा के मुताबिक 2021 में हर दिन 86 रेप हुए और हर घंटे वायलेंस के 49 मामले सामने आए. सवाल उठता है कि निर्भया कांड के बाद पूरे देश में इतना बड़ा उबाल आया, आंदोलन चला, फिर भी कहाँ कमी रह गई कि मामले घटने के बजाय साल दर साल बढ़ते रहते हैं? अभी और किन चीजों में बदलाव की सख्त ज़रूरत है, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.
छोटे छोटे शहरों से, खाली बोर दोपहरों से हम तो झोला उठा के चले...एक फिल्म आई थी 'बंटी और बबली', उसी का एक गाना है ये और इसी लाइन पर बिहार के कई बंटी-बबली अपने घर से झोला उठाकर भाग रहे हैं, विवाह करने. प्रेम विवाह. बिहार जैसे सूबे जहाँ समाज जाति के नाम पर अलग अलग खांचों में बंटा है. जहाँ पुरुषों की सत्ता आदि काल से चली आ रही है. शादी के नाम पर दहेज़ की उगाही होती है, वहां कपल्स का यूं अपने अपने घर से भागकर ब्याह रचाना अपने आप में बड़ी हिम्मत की बात है. क्योंकि ऐसी घटनाओं के बाद लड़के और लड़कियों पर क़ानूनी से लेकर जान जाने तक के ख़तरे होते हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बिहार में हर दूसरे दिन किसी शख़्स की हत्या लव अफेयर के चलते होती है. लेकिंन दिलचस्प बात ये है कि इन सबके बावजूद ऐसे कपल्स की तादाद में भारी उछाल आया है जो पिता के घर से भागकर अपनी मर्जी के पार्टनर के साथ घर बसा रहे हैं. बिहार पुलिस का डेटा कहता है कि 2020 के मुक़ाबले ऐसे मामलों में 37 फीसदी का उछाल आया है. NCRB का डेटा कहता है कि अकेले 2021 में बिहार में शादी के लिए अपहरण के 6608 मामले दर्ज़ कराए गए. तो बिहार में भागकर शादी करने के मामले किन वजहों से बढ़ रहे हैं, लड़के-लड़कियां परिवार और समाज के बनाये बैरियर कैसे तोड़ रहे हैं और ऐसे ही कुछ केस स्टडीज़, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.

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