
अतीक-अशरफ हत्याकांड में बड़ा खुलासा, होटल में शूटर्स के पास नहीं थे माइक-कैमरा, किसी बाहरी ने की थी मदद
AajTak
अतीक और अशरफ की हत्या करने आए शूटर्स जिस होटल में ठहरे थे, उसके मैनेजर ने अहम जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि शूटर सिर्फ पिट्ठू बैग लेकर आए थे. हत्या से 3 दिन पहले जब वे होटल में रुके थे, तो उनके पास प्रेस आईडी कार्ड, माइक या कैमरा नहीं था. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या उनकी मदद बाहर से कोई और कर रहा था.
पुलिस की सुरक्षा के बीच माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के सनसनीखेज हत्याकांड को शूटर अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी ने अंजाम दिया था. पत्रकार बनकर पहुंचे तीनों आरोपियों ने अतीक और अशरफ पर उस वक्त ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी, जब दोनों मीडिया से बात करनी शुरू की थी. अतीक और अशरफ की हत्या करने आए शूटरों के बारे में आजतक को अहम जानकारी मिली है.
केवल पिट्ठू बैग लेकर होटल आए थे हमलावर
हत्या से 3 दिन पहले जब वे होटल में रुके थे, तो उनके पास कोई भी आईडी कार्ड, माइक या प्रेस का कैमरा नहीं था. होटल मैनेजर के मुताबिक, बुकिंग के समय वे केवल एक पिट्ठू बैग लेकर आए थे. मगर, हत्या वाले दिन हत्यारे के गले में आईडी कार्ड, हाथ में माइक और कैमरा आ गया था.
पुलिस का शक- बाहर से कोई कर रहा था शूटरों की मदद
सवाल यह है कि शूटरों को आखिर वो किसने उपलब्ध करवाया? पुलिस को शक है कि हत्या के दिन कोई और भी इनकी बाहर से मदद कर रहा था. एसआईटी और पुलिस को शक है कि कोई एक प्रयागराज का रहने वाला और एक बाहरी व्यक्ति इनकी मदद कर रहा था. शूटर उनके फोन से ही आगे बात करते थे, जिससे इंस्ट्रक्शन दिए जाते थे. यही वजह है कि शूटरों के पास से भी कोई मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ था.
16 सेकंड में दागी गई थीं 18 गोलियां

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.










