
अजित पवार के आखिरी सात मिनट की मिस्ट्री... अब तीन एंगल पर टिकी प्लेन क्रैश की जांच
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अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था. जिस शख्स ने ताउम्र वक्त की पाबंदी और अनुशासन को अपनी राजनीति का हथियार बनाया, नियति ने उनके शव की पहचान भी वक्त बताने वाली उसी घड़ी से कराई.
महाराष्ट्र की राजनीति में 'वक्त' को अपनी मुट्ठी में रखने वाले अजित पवार की जीवन-घड़ी बुधवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर हमेशा के लिए ठहर गई. बारामती एयरपोर्ट के पास हुए एक भीषण विमान हादसे ने न केवल सूबे के डिप्टी सीएम, बल्कि उनके साथ सवार चार अन्य लोगों को भी मौत की आगोश में सुला दिया. यह हादसा महज एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी चूक या साजिश, इसे लेकर अब देश की सियासत और जांच एजेंसियां आमने-सामने हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्लेन में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी.
बुधवार सुबह जब बारामती के पास विमान के मलबे से लपटें उठ रही थीं, तब पहचान करना भी मुश्किल था. प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था. जिस शख्स ने ताउम्र वक्त की पाबंदी और अनुशासन को अपनी राजनीति का हथियार बनाया, नियति ने उनके शव की पहचान भी वक्त बताने वाली उसी घड़ी से कराई.
अजित पवार के पार्थिव शरीर को बारामती लाया जा चुका है. अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले को अस्पताल के बाहर फूट-फूटकर रोते देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं. गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे.
आखिरी 7 मिनटों का पूरा घटनाक्रम
शुरुआती जांच में विमान को पूरी तरह एयरवर्थी बताया गया है, पायलट अनुभवी थे, कोई MAYDAY कॉल नहीं गया, फिर भी हादसा हुआ. ऐसे में हादसे की जांच अब उन अंतिम सात मिनटों पर सिमट गई है, जब विमान बारामती की एयरस्ट्रिप के ऊपर चक्कर लगा रहा था. दरअसल, 28 जनवरी को समय सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर मुंबई से बारामती के लिए ‘लीयरजेट-45’ विमान ने उड़ान भरी. अजित पवार जिला परिषद चुनाव की रैलियों के लिए रवाना हुए थे. उड़ान सामान्य थी, मौसम में कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी.
करीब 8:37 बजे विमान पहली बार रडार से गायब हुआ. दो मिनट बाद 8:39 बजे वह दोबारा रडार पर दिखाई दिया. फ्लाइटराडार-24 के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान विमान ने ‘गो-अराउंड मैन्यूवर’ किया यानी लैंडिंग को बीच में छोड़कर दोबारा ऊंचाई ली. 8 बजकर 38 मिनट 18 सेकंड पर पहली लैंडिंग की कोशिश हुई, लेकिन खराब दृश्यता के कारण विमान रनवे पर नहीं उतर पाया. 8 बजकर 38 सेकंड 45 सेकंड पर पायलट गो-अराउंड का फैसला लेते हैं. विमान उसी दिशा में लौटता है, जिस दिशा से पहले आया था.

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