
अखिलेश-नीतीश की मुलाकात में दिखी एकजुटता लेकिन राह में चुनौतियां भी कम नहीं!
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मिशन-2024 के लिए विपक्षी एकता बनाने की कवायद कर रहे हैं. इसके मद्देनजर नीतीश ने सोमवार को पहले ममता बनर्जी से और उसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की. इस दौरान दोनों ही नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की बात कही, लेकिन कांग्रेस और बसपा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की.
तीसरी बार केंद्र की सत्ता में बीजेपी को आने से रोकने के लिए विपक्षी एकता की कवायद तेज हो गई है. इस कड़ी में बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने सोमवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की. यह मुलाकात एक घंटे तक चली, लेकिन दोनों ही नेताओं की प्रेस कॉफ्रेंस महज 7 मिनट में खत्म हो गई. बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की लिए बैठक में बातें तो हुईं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सबकुछ तय हो गया. ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार सपा के साथ कांग्रेस और बसपा को विपक्षी खेमे में जोड़ पाएंगे?
ममता और अखिलेश से मिले नीतीश
कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बातचीत के 12 दिनों के भीतर नीतीश कुमार ने ममता और अखिलेश से मिलने की कवायद की है. वहीं, सोमवार की बैठकों से यह संकेत मिले हैं कि दोनों क्षेत्रीय दलों (टीएमसी और सपा) के प्रमुख अब कांग्रेस के प्रति अपनी उदासीनता छोड़ने और 2024 के आम चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन के लिए सहमत हैं. ममता बनर्जी ने नीतीश कुमार के साथ लगभग एक घंटे की बैठक की तो अखिलेश के साथ भी इतनी ही देर मुलाकात चली, लेकिन कोई ऐसी बात निकलकर बाहर नहीं आ पाई जिससे ये पता चलता हो कि किसी ठोस कार्यक्रम पर ये लोग आगे बढ़ पाए हैं. दरअसल, यूपी में विपक्षी एकता की राह में कई सियासी चुनौतियां भी हैं.
अखिलेश-नीतीश ने दिया एकता का संदेश
नीतीश-अखिलेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई भी ऐसी नई बात सामने नहीं आई, जिससे यह पता चले कि विपक्ष को एक करने की नीतीश कुमार की कोशिश रंग लाई है. हालांकि, अखिलेश यादव ने यह जरूर कहा कि बीजेपी को हटाने के लिए वो साथ देने को तैयार हैं. नीतीश कुमार ने भी आधिकारिक तौर पर कहा कि अगर विपक्ष के ज्यादा से ज्यादा दलों में एकता हो जाए तो बीजेपी को आसानी से हटाया जा सकता है. वह इसके लिए गंभीरता से कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन बिहार की तर्ज पर यूपी में नीतीश क्या अखिलेश को कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए मना पाएंगे और बसपा को लेकर किस रणनीति के साथ आगे बढ़ पाएंगे, यह बड़ा सवाल है.
कांग्रेस पर तस्वीर साफ नहीं

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