
Shankhnaad: कांग्रेस के 9 सवाल, मोदी सरकार पर वार!
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26 मई यानी आज से ठीक 9 साल पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. इन 9 सालों में बहुत कुछ बदला. सियासत का चेहरा बदला, कई रिकॉर्ड बने, कई रिकॉर्ड टूटे. अब बारी है इन नौ सालों में बीजेपी के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड की. चित्रा त्रिपाठी के साथ देखें चुनावी शंखनाद.

आज के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने मुम्बई में बड़ी सफलता हासिल की है. पिछले चालीस वर्षों में पहली बार भाजपा बीएमसी की मेयर की कुर्सी संभालने को तैयार है. भाजपा ने विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बनाया है और जनता ने इसे स्वीकार किया है. चुनाव की मतगणना अभी चल रही है, लेकिन शुरुआती रुझान साफ दिखा रहे हैं कि भाजपा और उसके गठबंधन को भारी बहुमत मिलेगा. विपक्ष खासकर शिवसेना के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को कुछ सीटें मिली हैं पर भाजपा की बढ़त स्पष्ट है.

बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट का गठबंधन आगे चल रहा है. ठाकरे बंधुओं और एनसीपी-एसपी का गठबंधन भी 80 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि हार के बावजूद ठाकरे बंधु मराठी बहुल इलाकों, खासकर ग्रेटर मुंबई में अपनी साख बचाने में कामयाब रहे हैं. हार के बावजूद उनके वजूद पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.

बीएमसी चुनाव में मिली जीत के बाद बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रमुख राजनीतिक नेताओं पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि बाला साहेब ठाकरे जी ने सोनिया गांधी के सामने कभी झुकने से इनकार किया था, लेकिन आज उनके पुत्र उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ हैं और महाविकास अघाड़ी अब पिछड़ा गठबंधन बन गई है. पीएम मोदी और सीएम फडणवीस महाराष्ट्र के विकास को लेकर काम कर रहे हैं.

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर इलाके में PIA के लोगो वाला विमान के आकार का संदिग्ध गुब्बारा मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं. इससे पहले भी सांबा जिले के रामगढ़ क्षेत्र में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा गुब्बारा भी बरामद किया जा चुका है. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के चलते सीमा से सटे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है.

इस एपिसोड में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही लूट की कहानी बयान की गई है. लखनऊ के नीरज मिश्रा, रांची के तिवारी परिवार, मुंगेर के टिंकू और भोपाल की शालू यादव के अनुभवों से पता चलता है कि कैसे मरीजों को भारी बिल देकर भी सही इलाज नहीं मिलता. कई अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ होता है और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं. इस रिपोर्ट में सरकारी और निजी अस्पतालों की स्थिति, मरीजों की परेशानियां और प्रशासन की लापरवाही की पूरी जांच-पड़ताल की गई है.








