
Operation Midnight Climax: जब CIA ने 'वेश्यालय' को बनाया हथियार, कोल्ड वॉर के दौरान चली सबसे बड़ी चाल!
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ये एक गैरकानूनी तरीके से चलाया गया ऑपरेशन था, जिसके तहत लोगों के दिमाग को कंट्रोल किया जाता था. इसमें शामिल वेश्याओं को पैसे और दूसरे लाभ मिलते थे.
दुनिया के तमाम देशों की खुफिया एजेंसियों ने अपने अपने मकसद को पूरा करने के लिए तमाम तरह के ऑपरेशन चलाए हैं. ऐसा ही एक ऑपरेशन था, मिडनाइट क्लाइमेक्स. इसमें एक खुफिया एजेंसी ने वेश्यालय चलाया और अपने ही लोगों पर खतरनाक प्रयोग किए. जब शीत युद्ध अपने चरम पर था. तब दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियां अमेरिका और सोवियत संघ एक दूसरे को हराने के लिए खौफनाक तरीके अपना रही थीं. इन्होंने हथियारों के बजाए दिमाग से लड़ने का रास्ता भी चुना. इसके तहत सैनिकों के दिमाग को कंट्रोल किया जाना था.
सोवियस संघ अमेरिकी सैन्य कैदियों के दिमाग को कंट्रोल कर उनसे सबकुछ उगलवा लेता था. इस तरह की रिपोर्ट्स से अमेरिका की चिंता बढ़ रही थी. इससे निपटने के लिए सीआईए ने एक गैरकानूनी एक्सपेरिमेंट शुरू किया. इसका मकसद उस 'ट्रुथ ड्रग' की जानकारी जुटाना था, जिसका इस्तेमाल ब्रेनवाशिंग और मनोवैज्ञानिक यातना के जरिए पूछताछ और जबरन कुछ स्वीकार करवाने के लिए हो सकता था. ऑपरेशन मिडनाइड क्लाइमेक्स की शुरुआत साल 1954 में सैन फ्रांसिस्को के भीड़ भरे इलाके में एलएसडी (Lysergic acid diethylamide) नाम के ड्रग्स से भरे वेश्यालय में हुई थी.
दिमाग से लड़ा जाने वाला युद्ध
इसका मतलब ये था कि क्या ड्रग्स के जरिए मदहोश किए जाने के तरीके को सोवियत के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. ये नए तरह का 'मस्तिष्क युद्ध' था. इसके तहत ऑपेरशन से अंजान अमेरिकी पुरुषों को वेश्याएं शारीरिक संबंध बनाने का झांसा देकर एक बिल्डिंग में लेकर आती थीं. जहां बिना बताए इन पुरुषों को ड्रग्स दिए जाते.
वहां लगे शीशे के दूसरी तरफ बैठे सीआईए के एजेंट ड्रग्स के असर को देखा करते थे. इस बिल्डिंग को बाद में चार मंजिला घर में बदल दिया गया. यहां छह बेडरूम और सात बाथरूम थे. इसे अक्टूबर 2015 में 10 मिलियन डॉलर में बेचा गया था.
ऑपरेशन के तहत शुरू किए गए वेश्यालय को फेडरल एजेंट्स ने 1963 तक यानी पूरे 8 साल तक चलाया. इस काम को जॉर्ज हंटर व्हाइट ने संभाला था. वो फेडरल ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स में एजेंट और ऑफिस ऑफ स्ट्रैटेजिक सर्विसेज में सीआईए सलाहकार थे.

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