
NDA से मोदी, 'INDIA' से कौन... PM उम्मीदवार घोषित करने से क्यों बच रहा विपक्ष?
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विपक्ष ने बेंगलुरु की बैठक के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के जवाब में नया गठबंधन बनाने का ऐलान कर दिया लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के मुकाबले कौन उम्मीदवार होगा? इसे लेकर पत्ते नहीं खोले हैं. विपक्ष पीएम कैंडिडेट घोषित करने से परहेज क्यों कर रहा है? क्या है रणनीति?
2024 के चुनाव की सियासी पिच तैयार हो चुकी है और टीमें भी. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) जीत की हैट्रिक लगाने के लिए एकजुट है तो, विपक्ष भी एनडीए का मुकाबला करने के लिए I.N.D.I.A. नाम से नए गठबंधन के साथ तैयार है. I.N.D.I.A. यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस. एनडीए में जहां 38 दल हैं तो वहीं विपक्षी गठबंधन में अभी 26 पार्टियां.
विपक्ष के गठबंधन की तस्वीर साफ हो रही है लेकिन नेतृत्व को लेकर सवाल कायम हैं. एनडीए का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे. दूसरी तरफ, बेंगलुरु बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये सवाल पूछा गया कि विपक्षी गठबंधन का चेहरा कौन होगा? गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा? बैठक की अध्यक्षता करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसके जवाब में कहा कि कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी. इसमें 11 सदस्य होंगे. संयोजक और सह संयोजक भी बनाए जाएंगे जो सभी घटक दलों में समन्वय स्थापित करने का काम करेंगे. खड़गे के जवाब को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विपक्ष नरेंद्र मोदी के मुकाबले किसी नेता को आगे कर चुनाव मैदान में उतरने की जगह सामूहिक नेतृत्व के फॉर्मूले पर आगे बढ़ेगा.
प्रेसिडेंशियल स्टाइल बनाम सामूहिक नेतृत्व
साल 1996 के चुनाव से ही बीजेपी प्रधानमंत्री पद के लिए अपना चेहरा आगे कर चुनाव लड़ती रही है. 1998 में एनडीए की स्थापना के बाद भी ये परंपरा कायम है. 1996 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी बीजेपी के पीएम उम्मीदवार रहे तो 2009 में एनडीए ने लालकृष्ण आडवाणी पर दांव लगाया. दूसरी तरफ, 2004 के चुनाव में जब यूपीए अस्तित्व में आई थी, तब भी गठबंधन ने वाजपेयी के मुकाबले किसी नेता को आगे नहीं किया था. यूपीए की सरकार बनी और डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने. 2009 में भी यूपीए ने सत्ता में वापसी की और मनमोहन पीएम बने रहे.
साल 2014 के चुनाव में एनडीए ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. यूपीए का चेहरा मनमोहन ही थे. एनडीए को जीत मिली. 2019 के चुनाव में भी विपक्ष ने किसी भी नेता को पीएम कैंडिडेट के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया. हालांकि, कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार की बागडोर संभाली और उनको ही पीएम पद के लिए विपक्ष का अघोषित चेहरा माना गया.
बीजेपी को प्रेसिडेंशियल स्टाइल सूट करती है और पार्टी की रणनीति विपक्ष को अपनी इसी पिच पर लाने की है. बीजेपी चाहती है कि विपक्ष चेहरा घोषित कर दे. इससे चुनाव पीएम मोदी और उस नेता के बीच का बन जाएगा. दूसरी तरफ विपक्ष 2024 की लड़ाई को एनडीए बनाम I.N.D.I.A. बनाना चाहता है. विपक्ष की रणनीति चुनावी जंग को एक चेहरे की जगह सामूहिक नेतृत्व के फॉर्मूले से लड़ने की है.

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