
सेटेलाइट इमेज में भी 5 साल से दिख रहा था गड्ढा और पानी, अफसरों को युवराज की मौत तक नहीं आया नजर ?
AajTak
नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने सिस्टम की वर्षों पुरानी लापरवाही उजागर कर दी. गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि जिस गहरे गड्ढे में कार गिरी, वहां 2021 से पानी भरा था. न बैरिकेडिंग लगी, न चेतावनी संकेत. पहले भी हादसा हुआ, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई. अब गिरफ्तारी हुई है, लेकिन प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल कायम हैं.
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत अब महज़ एक सड़क हादसा नहीं रही. यह घटना सिस्टम की उस सामूहिक लापरवाही की तस्वीर बन चुकी है, जिसमें सालों से दिख रहा खतरा, चेतावनियों के बावजूद अनदेखा किया जाता रहा.
गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरें अब उस सच्चाई को सामने ला रही हैं, जिसे प्रशासन, प्राधिकरण और जिम्मेदार विभाग या तो देख नहीं पाए या देखना नहीं चाहते थे. जिन तस्वीरों को आम नागरिक एक क्लिक में देख सकता है, वही तस्वीरें बताती हैं कि जिस गहरे गड्ढे में युवराज की कार गिरी, वहां 2021 के अंत से लगातार पानी भरा हुआ था. यह गड्ढा न केवल मौजूद था, बल्कि तीन साल से ज्यादा समय तक असुरक्षित, खुला और जानलेवा बना रहा.
सैटेलाइट तस्वीरें क्या कहती हैं?
पीटीआई द्वारा अप्रैल 2009 से मार्च 2025 तक की गूगल अर्थ सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा में कई अहम तथ्य सामने आए हैं. 2009 से 2015 तक यह इलाका कृषि भूमि था. तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि यहां फसलें थीं, सिंचाई की लाइनें थीं. 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को मंजूरी मिली, जिसके बाद भूमि उपयोग बदला गया. पेड़-पौधे साफ किए गए और बड़े स्तर पर खुदाई शुरू हुई. लेकिन नवंबर 2021 से पहले तक किसी भी सैटेलाइट इमेज में इस स्थान पर कोई बड़ा जलभराव नहीं दिखाई देता. नवंबर 2021 की सैटेलाइट तस्वीरें पहली बार उस गड्ढे में बड़े पैमाने पर पानी भरा हुआ दिखाती हैं. इसके बाद 2022, 2023 और 2024 की तस्वीरों में हालात और बदतर होते चले गए जैसे गड्ढे में काला ठहरा हुआ पानी, काई और शैवाल की परत, आधी डूबी निर्माण सामग्री, चारों ओर उगी झाड़ियां. ये सब इस बात का सबूत हैं कि यह जगह लंबे समय तक यूं ही छोड़ दी गई. मार्च 2025 की सबसे ताजा सैटेलाइट तस्वीर में भी गड्ढा जस का तस दिखाई देता है. पानी से लबालब, चारों ओर अव्यवस्थित, जबकि उससे सटी सड़कें पूरी तरह विकसित नजर आती हैं.
एक हादसा, जिसने कई साल की लापरवाही उघाड़ दी
17 जनवरी की रात करीब 12 बजे गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 वर्षीय युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 में सड़क किनारे बने नाले को तोड़ते हुए सीधे स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 के प्लॉट ए-3 में जा गिरी. वहां पहले से मौजूद गहरा और पानी से भरा गड्ढा युवराज के लिए मौत का कुंआ साबित हुआ. कार कुछ ही पलों में पानी में समा गई. युवराज ने घटना के तुरंत बाद पिता को कॉल कर जानकारी दी, उन्होंन पुलिस को सूचना दी फिर मौके पर पहुंचे. देखते ही देखते वहां पुलिस, फायर ब्रिगेड सहित कई अन्य विभागों की टीम पहुंच गई. लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ. युवराज वहां से बचाओ बचाओ चिल्लाता रहा. अंतत: युवराज कार सहित पानी में डूब गया और उसकी जान चली गई.

तेलंगाना के सिद्धिपेट शहर में शक और पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया. पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते एक पति ने पहले उसे कीटनाशक पिलाया, फिर गला रेतकर हत्या कर दी. घटना में बीच-बचाव करने आई 11 वर्षीय बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि आरोपी ने खुद पर भी हमला कर लिया. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

वाल्मीकि की रामायण की एक दुर्लभ 233 साल पुरानी संस्कृत मैन्युस्क्रिप्ट अयोध्या के राम कथा म्यूजियम को सौंपी गई है. सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर श्रीनिवास वरखेड़ी ने वाल्मीकि रामायणम (तत्त्वदीपिका के साथ) की मैन्युस्क्रिप्ट प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम एंड लाइब्रेरी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा सौंपी है.

पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा छह जनवरी को हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली, बाद में उसकी मौत हो गई. पुलिस ने शुरुआती रूप से इसे खुदकुशी बताया लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की आशंका जताई गई. मामले की जांच SIT को सौंप दी गई है. पुलिस की लापरवाही और अंतरिम रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवार ने हॉस्टल की संदिग्ध गतिविधियों और पैसे के ऑफर का भी आरोप लगाया है. मामला अभी भी विवादों में है.










