
J-K- मुठभेड़ में मारे गए चारों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे, पाकिस्तान में बैठा है हैंडलर
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इन आतंकियों को भेजने की साजिश इशाक मौलवी ने रची थी जो इस समय पाकिस्तान में है. वह मूल रूप से दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है. बता दें कि मारे गए सभी 4 आतंकवादियों ने हाल ही में घुसपैठ की थी.
जम्मू के सिधरा में बुधवार को सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए 4 आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद आतंकी समूह के थे. इन आतंकियों को भेजने की साजिश इशाक मौलवी ने रची थी जो इस समय पाकिस्तान में है. वह मूल रूप से दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है. बता दें कि मारे गए सभी 4 आतंकवादियों ने हाल ही में घुसपैठ की थी.
गौरतलब है कि बुधवार को जम्मू शहर के बाहरी इलाके सिधरा में आतंकियों और सुरक्षाबल में मुठभेड़ हुई थी. एडीजीपी जम्मू , मुकेश सिंह ने बताया कि इलाके में कुछ आतंकियों के छिपे होने की खबर थी. इसके बाद चले ऑपरेशन में चार को मार गिराया गया. जब गोलीबारी हुई तब आतंकवादी एक ट्रक में थे. दोनों ओर से हो रही गोलीबारी सुबह 08 बजकर 35 मिनट पर पूरी तरह से रुक गई. मारे गए आतंकवादियों का शव बरामद किए गए. इसके अलावा इनके पास से 7 एके-47 राइफल, 3 पिस्टल समेत अन्य गोला-बारूद बरामद किया गया है. ट्रक मालिक की अभी पहचान नहीं हो पाई है, ट्रक जम्मू से श्रीनगर जा रहा था.
मुकेश सिंह ने आगे बताया कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी. इस बीच इलाके में बुधवार सुबह एक संदिग्ध ट्रक दिखाई पड़ा. आम तौर पर ट्रक की मूवमेंट 12 बजे रात के बाद होती है लेकिन इसे सुबह में देखा गया तो संदेह हुआ. उन्होंने बताया कि- इसके बाद हमने ट्रक को रोका और ड्राइवर को नीचे बुलाया लेकिन वह टॉयलेट जाने के बहाने भाग निकला. इसके बाद ट्रक की चेकिंग के दौरान फायरिंग होने लगी तो हमने इसका जवाब दिया. उनके पास काफी हथियार थे.
बता दें कि जम्मू कश्मीर में बीते माह से आतंकियों का सफाया करने के लिए सुरक्षाबल 'ऑपरेशन ऑल आउट' चला रहे हैं. सेना की ओर से ये ऑपरेशन घाटी में मौजूद विदेशी आतंकियों का सफाया करने के लिए चलाया जा रहा है. सुरक्षाबलों के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू कश्मीर में लोकल रिक्रूटमेंट अब केवल कुछ ही जिलों में हो रहा है वो भी न के बराबर. जम्मू कश्मीर में जो विदेशी आतंकी मौजूद हैं, उनकी जिंदगी कुछ महीनों की मेहमान है. यही वजह है कि लोकल युवाओं और युवतियों को बड़े आतंकी कमांडर सूचना देने, मदद पहुंचाने के बदले पैसे दे रहे हैं.

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