
Ground Report: धराली में दिख रहे तबाही के निशान, खुदाई में मिल रहे मलबे में दफ्न होटल-घर और गाड़ियां
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स्थानीय लोगों ने आज तक को बताया कि करीब 100 साल पहले खीर गंगा के बहाव की दिशा आज जैसी थी, जो इन वर्षों के दौरान इसके आसपास स्थायी निर्माण के चलते बदल गई.
उत्तरकाशी के धराली गांव में चल रहे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में सोमवार को बारिश के कारण बाधा आई. रेस्क्यू टीम आज भी किसी लापता की बरामदगी नहीं कर सकी. फ्लैश फ्लड के साथ आए मलबे ने 50 फीट ऊंचे स्ट्रक्चर को भी अपनी जद में ले लिया. धराली में रेस्क्यू टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं. खुदाई के बाद तबाही की डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं.
पूरा का पूरा होटल और गाड़ियां मलबे में दबी मिल रही हैं. कहीं लोगों के पर्स बरामद हो रहे हैं, तो कहीं सैलाब में दफ्न पूरी इमारत. धराली गांव का अधिकतर हिस्सा दलदल में तब्दील हो चुका है. खीर गंगा नदी ने अपना रास्ता बदल लिया है. खीर गंगा की धारा दशकों पहले जिस दिशा में बह रही थी फिर से उसी ओर मुड़ गई है. हालांकि जीवित बचे लोगों को खोजने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं. 5 अगस्त को बादल फटने के बाद आए सैलाब में लगभग आधा गांव दफन हो गया था.
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स्थानीय लोगों ने आज तक को बताया कि करीब 100 साल पहले खीर गंगा के बहाव की दिशा आज जैसी थी, जो इन वर्षों के दौरान इसके आसपास स्थायी निर्माण के चलते बदल गई. खीर गंगा जमीन से काफी ऊपर बह रही है. स्थानीय लोग आपदा के लिए पर्यटकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. धराली गांव का अधिकांश हिस्सा तबाह हो चुका है.
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स्थानीय निवासी अपने टूटे घरों को देखने आ रहे हैं. कई लोग गांव में सैलाब आने से पहले सुरक्षित जगहों पर भाग गए थे. धराली निवासी सोनू पवार ने आज तक को बताया कि उनका घर सैलाब में बह गया. उन्होंने बताया कि धराली में उस दिन सैलाब आया, उस दिन 200 से भी ज्यादा लोग थे. सोनू ने बताया कि सरकार की ओर से मदद पहुंच रही है. पांच लाख रुपये का चेक पीड़ितों को दिया जा रहा है. राशन, जूते और कपड़े भी पहुंच रहे हैं.

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