
DM बन WhatsApp पर अधिकारियों को ट्रांसफर की धमकी, पैसे की मांग, ठगों का नया खेल
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बिहार में साइबर शातिर अधिकारियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. सीधे आईएएस अधिकारी और उनके मातहत आने वाले कर्मचारी को अपना निशाना बना रहे हैं.
देश में यदि साइबर शातिरों की चालाकी की कोई प्रतियोगिता हो, तो बिहार के शातिर उसमें अव्वल आएं. जी हां, इन दिनों बिहार में साइबर ठगी के नए नए मामले सामने आ रहे हैं. इसके शिकार बन रहे हैं, सीधे आईएएस अधिकारी और उनके मातहत आने वाले कर्मचारी और अधिकारी. ताजा मामला खगड़िया का है. जहां के डीएम की छुट्टी पर जाने के बाद साइबर शातिरों ने खतरनाक साजिश रची और सोशल मीडिया एकाउंट बनाकर जिले के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से लाखों की वसूली कर ली.
DM के नाम से फर्जी अकाउंट साइबर शातिरों ने पहले जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष के नाम व्हाट्सएप एकाउंट बनाया. जैसे ही वो छुट्टी पर गए, शातिर जिले के बाकी अधिकारियों से तल्ख अंदाज में चैटिंग करने लगे. उन्हें लापरवाह ठहराकर ट्रांसफर पोस्टिंग की धमकी देने लगे. डरे-सहमे अधिकारियों ने जिलाधिकारी की बात मान ली. मैसेज कर क्षमा मांगने लगे. उसके बाद डीएम की तरफ से पूछा गया कि कहां हो और क्या कर रहे हो.
डीएम का फोटो लगाया अधिकारी डीएम का फोटो लगा व्हाटसएप देखकर ऐसे ही सहम गए. इसके सबसे पहले शिकार बने निबंधन पदाधिकारी यशपाल. उन्हें मैसेज आया और उसके बाद उनसे कहा है कि एमेजॉन के माध्यम से गिफ्ट कार्ड भेजिए. जिला निबंधन पदाधिकारी साहब शातिरों को झांसे में आ गए और एक लाख रुपये खाते में डाल दिया.
पुलिस साइबर ठगों की तलाश में जुटी जब जिला निबंधन पदाधिकारी को ठगे जाने का एहसास हुआ, तो उन्होंने थाने में पदाधिकारी दर्ज कराई. जब इसकी जानकारी जैसे ही डीएम साहब तक पहुंची, उन्होंने अपना संदेश वायरल करवाया और कहा कि कोई उनके नाम के झांसे में नहीं आए. उन्होंने कहा कि मेरे साथ ये कोई पहली घटना नहीं है.
मेरे नाम से पहले भी सोशल मीडिया पर फर्जी एकाउंट बनाकर पैसे मांगे गए हैं. लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. इधर शिकायत के बाद पुलिस साइबर ठगों की तलाश में जुट गई है. जिले के एसपी अमितेश कुमार ने बताया कि ये बहुत बड़ा गिरोह है. इसका पता लगाया जा रहा है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

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