
Delhi Blast: 6 डॉक्टर, दो मौलवी, 18 गिरफ्तार... दिल्ली धमाके में कितने किरदार, कितने अब भी फरार?
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दिल्ली ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हो चुकी है. जबिक 25 लोग घायल हैं. NIA की जांच में आतंकी संगठन जैश का नाम सामने आया है. यह जैश का व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल था, जो अब बेनकाब हो चुका है. जानें इस मामले में कौन-कौन हुए गिरफ्तार और कितने आरोपी हैं फरार.
देश की राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 की शाम जो धमाका हुआ था, उसकी गूंज अभी तक फिजा में बाकी है. दिल्ली के लोग खौफजदा हैं. पुलिस और जांच एजेंसियों ने रात दिन एक कर दिया है. कई आरोपी और संदिग्ध पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं. और कई ऐसे हैं, जो अब भी फरार हैं. लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 पर जिस कार में यह जोरदार विस्फोट हुआ, वह अमोनियम नाइट्रेट जैसे खतरनाक विस्फोटक से भरी थी. इस घटना में 13 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. दिल्ली पुलिस और NIA की जांच में यह साफ हो गया है कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक खतरनाक 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा था. आइए जानते हैं कि इस मामले में कितने लोग हुए गिरफ्तार और कितने हैं फरार?
जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का खतरनाक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक फैला हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से पढ़े-लिखे डॉक्टर शामिल थे. दिल्ली धमाके से कुछ घंटे पहले ही फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक जब्त किए गए थे, जिससे लगता है कि साजिशकर्ता घबरा गए थे.
धमाके के बाद का मंजर यह घटना 10 नवंबर 2025 की शाम करीब 6:52 बजे हुई. हरियाणा की Hyundai i20 कार (HR 26 CE 7674) लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी थी. CCTV फुटेज में कार को पार्किंग से निकलते हुए देखा गया, जिसमें ड्राइवर काला मास्क पहने हुए था. धमाके से पहले कार लगभग 3 घंटे सुनहरी मस्जिद पार्किंग में खड़ी रही. वहां से जाने के बाद ही उसमे धमाका हुआ. विस्फोट इतना तेज था कि आसपास की कई गाड़ियां जल गईं और चांदनी चौक की गलियों में भगदड़ मच गई. लोग दुकानों में छिपते नजर आए.
एनआईए ने शुरू की जांच NIA की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से किया गया हमला था. पहले दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच में जुटी थी. लेकिन आतंकी कनेक्शन का खुलासा होते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने केस अपने हाथ में ले लिया. इस मामले में UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत FIR दर्ज हुई है.
जल्दबाजी में हमला जांच में पता चला कि यह मॉड्यूल फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले कुछ डॉक्टरों से जुड़ा था. फरीदाबाद के अलग-अलग ठिकानों से 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक, AK-47 राइफलें, टाइमर और बैटरी बरामद हुईं हैं. कुछ मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक, इस मामले में JeM प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का सीधा कनेक्शन सामने आया है. इस मॉड्यूल का प्लान दिल्ली में 26/11 जैसे सीरियल ब्लास्ट का था, लेकिन पुलिस की छापेमारियों से घबरा कर मुख्य संदिग्ध ने जल्दबाजी में हमला कर दिया. फंडिंग पाकिस्तान से टेलीग्राम चैनलों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आ रही थी.
दिल्ली से तुर्की तक कनेक्शन! इस धमाके में अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) भी शामिल था. इसी दौरान NIA अब तुर्की कनेक्शन और महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क की जांच कर रही है. साजिश का किंगपिन डॉक्टर उमर मोहम्मद नबी था, जो पुलवामा के कोइल गांव का रहने वाला 36 वर्षीय MBBS डॉक्टर था. वह फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में काम कर रहा था. दो साल से फरीदाबाद में रहते हुए वह JeM के लिए विस्फोटक जमा कर रहा था. मार्च 2024 में कश्मीर से दिल्ली आया था. माना जा रहा है कि साथियों की गिरफ्तारी की खबर सुनकर वो घबरा गया और उसने कार में ही सुसाइड ब्लास्ट कर लिया.

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