
Delhi के पॉश इलाके में कैसे चल रहा था किडनी रैकेट? पीड़ित की जुबानी-पूरी कहानी
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Delhi Kidney racket busted: रैकेट में शामिल डॉक्टर और दलाल 30 लाख तक में किडनी का सौदा करते थे. एजेंट्स को 30 हजार मिलते थे, डॉक्टर को 3 लाख, लैब टेक्नीशियन को 40 हजार. जबकि डोनर यानी किडनी देने वाले को महज 2 से 4 लाख रुपए ही मिल पाते थे.
गुजरात के रहने वाले रघु की माली हालत ठीक नहीं थी. रोजगार की तलाश में कुछ महीने पहले वह देश की राजधानी दिल्ली पहुंचा. रघु के मुताबिक, उसे रोजगार मिलता इसके पहले ही किसी ने उसका पर्स और कीमती सामान चोरी कर लिया. इसके बाद बेबस और लाचार युवक नई दिल्ली के गुरुद्वारा पहुंच गया. वहां पर वह काम करने लगा और 4 दिनों तक वहीं पर रहा. इसी दौरान उसकी मुलाकात राजू नाम के एक शख्स से हुई. राजू जल्द समझ गया कि रघु के पास बिल्कुल भी पैसे नहीं हैं.
इसके बाद राजू रघु के पीछे पड़ गया कि वह अगर एक किडनी दे देता है, तो उसकी सारी समस्याएं हल हो जाएंगी और उसे इतने पैसे मिलेंगे कि उसके सारे काम बन सकते हैं, रघु के मुताबिक, उसने शुरुआत में तो मना कर दिया, लेकिन राजू ने उसका पीछा नहीं छोड़ा. रघु से हर दिन यह कहता कि वह किडनी दे दे. एक बढ़िया काम है. किसी एक शख्स की जान भी बचेगी और पैसे भी मिलेंगे. शरीर पर कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा. लगातार दबाव के बीच रघु राजू की बात मान गया.
इसके बाद रघु को लेकर राजू सीधे विपिन नाम के शख्स के पास पहुंचा. विपिन दलाल था. विपिन, रघु को लेकर पश्चिम बिहार के किराए के फ्लैट पर पहुंचा. अगले 10 दिनों तक रघु के सारे टेस्ट करवाए गए. इसके बाद मुझे उस शख्स से मिलवाया गया जिसे किडनी चाहिए थी. 13 मई को रघु को पश्चिम विहार फ्लैट पर ले जाया गया. वहां एक और डोनर था और एक दलाल मौजूद था. इसके बाद रघु को सोनीपत गोहाना के उस नर्सिंग होम में ले जाया गया जहां पर ट्रांसप्लांटेशन को अंजाम देना था.
रघु के मुताबिक, शनिवार शाम को उसे नर्सिंग होम ले जाया गया और रविवार के दिन में उसका ऑपरेशन कर दिया गया. डॉक्टर शनिवार की रात वहां पर पहुंचे थे. रघु के मुताबिक, ट्रांसप्लांटेशन के बाद उसके पेट में बहुत दर्द हो रहा था और 3 दिनों बाद उसे वापस दिल्ली शिफ्ट किया गया. वहां पर उसे 2 लाख दिए गए और कहा गया कि बाकी की रकम टांके कटने के बाद मिलेगी.
रघु के मुताबिक, जब टांके कटे तो उसे एक लाख 20 हजार और दिए गए फिर टैक्सी करके उसे हौजरानी पहुंचा दिया गया. उनके पहुंचने की थोड़ी देर बाद ही पुलिस आ गई और रघु ने पुलिस के सामने सारी बात कह दी.
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक डॉक्टर समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, गैंग का सरगना कुलदीप था. सूत्रों की मानें तो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप डॉक्टर्स के साथ ट्रांसप्लांट में साथ रहता था. पूछताछ में कुलदीप ने पुलिस को बताया कि वह अकेले भी पूरे ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पूरा ऑपरेशन कौन करता था?

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