
AFSPA हटने से कश्मीर के आम लोगों के लिए क्या बदल जाएगा, सेना की पावर में क्या बदलाव आएगा? 8 सवाल-जवाब में समझें
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गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में AFSPA को रद्द करने पर विचार करेगी. साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि सरकार की योजना जम्मू-कश्मीर से सैनिकों को वापस बुलाने और कानून व्यवस्था को अकेले स्थानीय पुलिस पर छोड़ने की भी है. जम्मू-कश्मीर के एक चैनल को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने ये बातें कही हैं. उन्होंने अपने बयान को दोहराया है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा- केंद्र सरकार सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) एक्ट यानी AFSPA को रद्द करने पर विचार करेगी. अमित शाह ने ये भी कहा- सरकार केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रही है और कानून व्यवस्था को जम्मू-कश्मीर पुलिस के हवाले किया जाएगा.
शाह का कहना था कि जम्मू कश्मीर की पुलिस ने कई बड़े ऑपरेशन का नेतृत्व किया है. शाह ने पाकिस्तान को दो टूक कहा- हम कश्मीरी युवाओं से बातचीत करेंगे, न कि उन संगठनों से जिनकी जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हैं. शाह ने पाकिस्तान की बदहाली का हवाला दिया और कहा, कश्मीर को सिर्फ पीएम मोदी ही बचा सकते हैं. शाह ने साफ शब्दों में कहा- बीजेपी और पूरी संसद का मानना है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है. पीओके में रहने वाले मुस्लिम भाई भी भारतीय हैं और हिंदू भाई भी भारतीय हैं. पीओके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है. आइए जानते हैं कि AFSPA हटने से कश्मीर में क्या बदल जाएगा और सेना के पावर में क्या बदलाव आएगा? सवाल-जवाब में समझें...
1. क्या AFSPA का विरोध किया जा रहा था?
जम्मू कश्मीर में AFSPA को दशकों से विरोध किया जा रहा है. दरअसल, राजनीतिक दलों और आम लोगों की कई सालों से मांग थी कि जम्मू कश्मीर में सेना को जो विशेष अधिकार हैं, उसे हटाना चाहिए. कई बार देखा गया कि इसका दुरुपयोग भी हुआ है. फर्जी एनकाउंटर हुए. हाल ही में राजौरी में कस्टडी में चार युवाओं की मौत ने माहौल गरमा दिया था.
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2. क्यों AFSPA को हटा रही है सरकार?

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