
786 नंबर की गाड़ियों का काफिला, महंगी कारों का कलेक्शन, लेकिन मुख्तार का ये सपना रह गया अधूरा!
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गाजीपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने शनिवार को गैंगस्टर के एक मामले में बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया. कोर्ट ने मुख्तार को 10 साल की सजा और पांच लाख का जुर्माना लगाया. मुख्तार को हमेशा से ही महंगी गाड़ियों का शौक रहा और उसके पास लग्जरी कारों का शानदार कलेक्शन रहा.
मुख्तार अंसारी एक ऐसा नाम है, जिसकी चर्चा होते ही बाहुबली और माफिया डॉन की छवि मने आ जाती है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि माफिया डॉन बनने से पहले कॉलेज के दिनों में मुख्तार क्रिकेट का बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ-साथ जबरदस्त निशानची था. मुख्तार को महंगी गाड़ियों का बहुत शौक था. कॉलेज के दिनों में दोस्तों के बीच लंबू के नाम से मशहूर मुख्तार दोस्तों के साथ बुलेट और जीप की सवारी करते हुए मोहमदाबाद और गाजीपुर की सड़कों पर अक्सर दिख जाता था.
मुख्तार जब गैंगस्टर से विधायक बना तो गाड़ियों का यह शौक उसके साथ काफिले की शक्ल में भी दिखने लगा. बदलते दौर के साथ मुख्तार के पास मारुति जिप्सी के पास टाटा सफारी, फोर्ड एंडेवर, पजेरो स्पोर्ट, ऑडी, BMW जैसी गाड़ियों का कलेक्शन खूब रहा. 80 और 90 के दशक में जब मुख्तार के भाई अफजाल विधायक हो चुके थे तब क्रिकेट खिलाड़ी मुख्तार अंसारी को बुलेट मोटर साइकिल, एंबेसडर कार और जीप से शिकार खेलने का शौक था.
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ये वो दौर था जब मार्केट में मारुति जिप्सी, मारुति कार और वैन जैसी गाड़ियों ने दस्तक दी थी, जिन्हें मुख्तार बड़े ही शौक से चलाता था. 1986 में हरिहरपुर के सच्चिदानंद राय हत्याकांड के बाद जब मुख्तार पहली बार जेल से बाहर आया तो फिर उसके काफिले में उस वक्त की लक्जरी गाड़ियों का काफिला था. मुख्तार अंसारी के काफिले में चलने वाली सभी गाड़ियों का नंबर भी 786 ही रहता था.
जैसे उस दौर में टाटा सफारी का बहुत क्रेज था, मुख्तार अंसारी के काफिले में एक सफेद खुली जिप्सी और 5 से 6 एक रंग की टाटा सफारी और सभी पे 786 का नंबर प्लेट रहती थी. जेल में बंद मुख्तार की चाहत थी की जब वो छूट कर बाहर आएगा तो उसके काफिले में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिकने वाली एस यू वी "हमर" भी शामिल हो, लेकिन ये शौक अभी तक पूरा ना हो सका.
मुख्तार के पास मौजूद कार कलेक्शन, उसके शौक की कहानी भी बयां करते हैं. साल 2005 से मुख्तार अंसारी तो जेल में बंद है, लेकिन उसकी पत्नी और बच्चे एक से बढ़कर एक गाड़ियों का शौक पाले हुए थे. मुख्तार की बेगम अफशां के पास ऑडी, मर्सडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी कारें थी, तो बेटे अब्बास और उमर के काफिले में टोयोटा फॉर्च्यूनर, फोर्ड एंडेवर और बीएमडब्ल्यू जैसी कारें होना आम बात है.

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