
6वीं से 8वीं तक के स्टूडेंट्स सीखेंगे कोडिंग और AI, ये है सीबीएसई का प्लान
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सीबीएसई ने 6वीं क्लास से 8वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए 33 विषयों की लिस्ट तैयार की है. ये मॉड्यूल 12-15 घंटे की अवधि के होंगे. स्कूलों को बताया गया है कि इन विषयों के लिए समय अवधि का 70% प्रैक्टिकल और 30% थ्योरी होनी चाहिए.
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है. ब्रिटिश शासन के बाद शिक्षा जगत में ये बड़ा बदलाव होगा. इस बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) शिक्षा व्यवस्था को पंख लगाने काम करने जा रही है. NEP 2020 के तहत कक्षा 6वीं से 8वीं तक स्किल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत की है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक मशीन की सोचने, सीखने और सामान्य रूप से इंसान की तरह काम करने वाली मशीन है. सीबीएसई 6वीं से 8वीं क्लास तक के स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने जा रहा है. इससे कोडिंग जैसे विषय भी जल्दी पढ़ाए जाएंगे. इनके साथ ही कक्षा 8वीं के लिए डेटा साइंस और कक्षा 6वीं के लिए "घर पर दवाइयां रखने के बारे में आपको क्या पता होना चाहिए" पढ़ाया जाएगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग समेत होंगे 33 विषय बोर्ड ने 33 विषयों की लिस्ट तैयार की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy), कोडिंग, डेटा साइंस, संवर्धित वास्तविकता (Augmented Reality), कश्मीरी कढ़ाई (इसे काशीदा कढ़ाई भी कहा जाता है, भारत के कश्मीर क्षेत्र से एक प्रकार की सुई का काम है.), सेटेलाइट्स एप्लीकेशन, ह्यूमैनिटी और कोविड-19 शामिल हैं.
70 प्रतिशत प्रैक्टिकल और 30% होगी थ्योरी ये मॉड्यूल 12-15 घंटे की अवधि के होंगे. स्कूलों को बताया गया है कि इन विषयों के लिए समय अवधि का 70% प्रैक्टिकल और 30% थ्योरी होनी चाहिए. कोडिंग के लिए सिलेबस माइक्रोसॉफ्ट द्वारा तैयार किया जाएगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाने का मकसद शिक्षा मंत्रालय 2020 में एक नई शिक्षा नीति लेकर आया, जिसके तहत उसने स्कूली शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा सहित उच्च शिक्षा में कई सुधार पेश किए. नीति में कहा गया है कि यह माना जाता है कि गणित और गणितीय सोच भारत के भविष्य और आने वाले कई क्षेत्रों और व्यवसायों में भारत की लीडरशिप भूमिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस आदि शामिल होंगे.
आसान हो जाएगी पढ़ाई जारी नोटिस में बताया गया "इस प्रकार, मैथ्स और कम्प्यूटेशनल सोच पर पूरे स्कूली वर्षों में अधिक जोर दिया जाएगा, जो कि मूलभूत चरण से शुरू होता है, विभिन्न प्रकार के नए तरीकों के माध्यम से, पहेली और गेम के रेगुलर इस्तेमाल सहित, जो गणितीय सोच को अधिक मनोरंजक और आकर्षक बनाते हैं. कोडिंग से जुड़ी गतिविधियां मध्य चरण में पेश किया जाएगा."

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