
5 साल से हों मुसलमान, बेटियों का हिस्सा नहीं कर पाएंगे दान... वक्फ में संपत्ति देने के नए नियम समझ लीजिए
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वक्फ संशोधन बिल 2025 में महिलाओं और विधवाओं का ध्यान रखा गया है अब किसी मुस्लिम शख्स को वक्फ बनाने से पहले महिलाओं, विधवाओं को उनका हिस्सा देना होगा. किसी को अपनी संपत्ति दान करने से पहले उसके लिए ये जरूरी होगा कि वो पांच साल से इस्लाम को मान रहा है. इसके अलावा आदिवासी और ASI की जमीन भी वक्फ नहीं की जा सकेगी.
वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में लगभग 12 घंटे की गरमागरम बहस के बाद पास हो गया है. आज इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जा रहा है और इसे आज ही पास किया जाएगा. वक्फ बिल संपत्तियों के मैनेजमेंट और रेगुलेशन में कई बदलाव लाता है. यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सरकारी निगरानी में लाने और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देता है. बिल के कानून बन जाने के बाद भी मुसलमान वक्फ बना सकेंगे, लेकिन सख्त नियमों और शर्तों के साथ.
आइए 10 बिंदुओं में समझते हैं कि इस बिल के कानून बन जाने से मुसलमान क्या कर पाएंगे और क्या नहीं कर पाएंगे. इस कानून का मुस्लिम समुदाय पर असर क्या होगा.
1- वक्फ बाय यूजर (Waqf by user) का खात्मा
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ मानी जाएगी, जिसे औपचारिक रूप से (यानी लिखित दस्तावेज या वसीयत के जरिए) वक्फ के लिए समर्पित किया गया हो. लेकिन पहले ऐसा नहीं था.
वक्फ बाय यूजर" एक पारंपरिक तरीका था जिसके तहत कोई संपत्ति, जैसे मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह, अगर लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक या सामुदायिक कामों के लिए इस्तेमाल हो रही थी, तो उसे बिना किसी औपचारिक दस्तावेज या घोषणा के भी वक्फ मान लिया जाता था. ये इस्लामिक कानून और भारत में वक्फ की पुरानी प्रथा का हिस्सा था.
लेकिन लोकसभा में पास बिल में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है. अब अगर कोई जमीन या इमारत सालों से मस्जिद या कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, लेकिन उसके पास वक्फ का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है, तो अब उसे वक्फ नहीं माना जाएगा.

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