
45 से ज्यादा नाम, दो बार बेचा Eiffel Tower... कैसे बना वो दुनिया का सबसे बड़ा 'नटवरलाल'?
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यूं तो आपने कई ठगों और उनकी कहानियों के बारे में सुना होगा. लेकिन क्या आपने ऐसे ठग के बारे में सुना है जिसने दो बार फ्रांस के लोगों को ही एफिल टॉवर (Eiffel Tower) बेच दिया था. इस ठग का असली नाम वैसे तो कोई नहीं जानता. क्योंकि उसने लोगों से ठगी करने के लिए अपने 45 से ज्यादा नाम रखे थे. लेकिन पुलिस ने उसे नाम दिया था विक्टर लस्टिग (Victor Lustig). चलिए जानते हैं इस ठग की पूरी कहानी...
4 जनवरी, 1890 का दिन... ऑस्ट्रिया-हंगरी (अब चेक रिपब्लिक) के हॉस्टिन (Hostinne) में विक्टर लस्टिग (Victor Lustig) का जन्म हुआ. उसका परिवार काफी गरीब था. कहा जाता है कि विक्टर जब 7 साल का हुआ तो उसके माता-पिता का तलाक हो गया था. जिसके बाद उसे उसके रिश्तेदारों ने अपने पास रख लिया.
वह बचपन से ही काफी शातिर था. लेकिन उसकी पढ़ाई-लिखाई में कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी. विक्टर की एक खास बात थी कि वह किसी भी चीज को बहुत ही जल्दी सीख जाता था और लोगों से दोस्ती करने में तो उसे महारत हासिल थी. वह किसी से भी जल्दी से दोस्ती करके उसे अपना बना लेता था.
लेकिन वह काफी गरीब था इसलिए उसने पैसा कमाने के लिए बचपन से ही भीख मांगना शुरू कर दिया था. जब भीख नहीं मिलती तो वह छोटी-मोटी चोरियां करता. लोगों की जेब काटता. ताकि दो वक्त का खाना खा सके. उसके बारे में कहा जाता है कि एक दिन वह रेस्टोरेंट के बाहर खड़ा था तो उसने देखा कि अंदर एक परिवार बैठा हुआ है. उनके सामने ढेर सारा खाना पड़ा है. लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे लोग उस खाने को यूं ही छोड़कर और बिल भरकर रेस्टोरेंट से बाहर निकल आए.
यह देख विक्टर को काफी गुस्सा आया. उसने सोचा कि जहां एक तरफ कई लोगों को खाने के लिए दो वक्त की रोटी भी नहीं मिलती. तो वहीं कुछ अमीर लोग इस तरह खाना बर्बाद करते हैं. तभी से उसने तय कर लिया कि वह अब अमीर लोगों से ठगी करेगा जिन्हें पैसे की कद्र नहीं होती.
विक्टर को आती थीं पांच भाषाएं वक्त बीता और विक्टर 18 साल का हो गया. Daily Mail के मुताबिक, उसका दिमाग इतना तेज था कि उसने बड़ा होते-होते पांच अलग-अलग भाषाएं सीख ली थीं. लूट और चोरी जैसी वारदातों को वह अब भी अंजाम देता था, जिसके चलते उसे कई बार जेल भी जाना पड़ जाता था. उसे कार्ड खेलना काफी पसंद था. इसलिए जब भी वह जेल में होता तो कार्ड खेलने की नई-नई ट्रिक्स सीखता.
उसने पेरिस, बुडापेस्ट, प्राग, ज्यूरिक जैसे शहरों में कई चोरियां कीं और वहां जेल की हवा भी खाई. लेकिन चोरी करके वह ज्यादा पैसा नहीं कमा पा रहा था. इसिलए उसने तय किया कि वह यूरोप छोड़कर अमेरिका जाएगा. जहां वह बड़ा हाथ मारेगा.

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