
"1947 की आज़ादी भीख," कंगना के बयान से फूटा विवाद का ज्वालामुखी
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पद्मश्री कंगना रनौत के एक बयान ने देश की सियासत में आग लगा दी है. विपक्ष कंगना पर ज्वालामुखी की तरफ फूट पड़ा है क्योंकि कंगना ने कह दिया है कि 1947 में आज़ादी भीख में मिली थी, असली आज़ादी तो 2014 में मिली है. कंगना का ये विचार एक बड़े वर्ग को रास नहीं आया और वो निशाने पर आ गईं. वैसे तो कंगना बॉलीवुड से लेकर देशभर में बड़बोली के नाम से मशहूर हैं, लेकिन इसबार कंगना ने उस बड़बोलेपन को भी क्रॉस कर दिया है. कंट्रोवर्सी क्वीन कंगना ने भारत की आज़ादी को लेकर जो बयान दिया है, उससे देश की सियासत का ज्वालामुखी फट पड़ा है. अब पूछने वाले यही पूछ रहे हैं कंगना को पता है इतिहास की कोई किताब है, कंगना को पता है, आज़ादी के नायक कौन कौन हैं, क्या कंगना को पता है इस देश को आज़ाद कराने के लिए हमारे नायकों ने अंग्रेज़ों की गोलियां खायी हैं, अंग्रेज़ों के अत्याचार झेले हैं, जेल गए हैं, आंदोलन किये हैं, और कंगना ने पद्मश्री का अवॉर्ड हाथ लगते ही सबकुछ धो डाला. देखें ये वीडियो

युद्ध को लेकर आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते क्या हैं, उनकी रणनीति क्या है? दुनिया के मन में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं. एक ओर ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन और अच्छी बातचीत होने और होर्मुज पर गिफ्ट मिलने की बात की है. पाकिस्तान के जरिये ईरान को 15 सूत्री प्रपोजल भेजे जाने का भी दावा है. तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ रही है. अमेरिका के 1000 अतिरिक्त हवाई सैनिक वहां भेजे जाने की रिपोर्ट्स हैं. पिछले हफ्ते 3 युद्धपोतों के साथ अतिरिक्त नौसैनिकों के रवाना होने की खबर आई थी. अमेरिकी कैंप से आ रहे विरोधाभाषी दावों के बीच ईरान के तेवर कड़े हैं. ईरान बातचीत से इनकार कर रहा है.

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