
'16 जून को कभी नहीं भूल पाएंगे जिनपिंग... ', बोले जनरल नरवणे
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नरवणे ने अपने संस्मरण 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों के बारे में कई खास और दुर्लभ जानकारी देते हुए कहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 16 जून को कभी नहीं भूलेंगे. क्योंकि इस दिन बीते दो दशक से अधिक समय से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को पहली बार "घातक" जवाबी आक्रमण का सामना करना पड़ा था.
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का कहना है कि चीन छोटे पड़ोसियों को डराने-धमकाने के लिए "wolf-warrior diplomacy" और "सलामी-स्लाइसिंग" रणनीति अपनाता रहा है. फिर भारतीय सेना ने दुनिया को दिखा दिया कि बस बहुत हो गया और इस तरह पड़ोसी दबंग को चुनौती दी. 28वें सेनाध्यक्ष ने 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी आक्रामकता पर भारतीय रिएक्शन को याद किया.
नरवणे ने अपने संस्मरण 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों के बारे में कई खास और दुर्लभ जानकारी देते हुए कहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 16 जून को कभी नहीं भूलेंगे. क्योंकि इस दिन बीते दो दशक से अधिक समय से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को पहली बार "घातक" जवाबी आक्रमण का सामना करना पड़ा था.
जून 2020 में हुई थी चीनी सेना से झड़प नरवणे ने गलवान घाटी की घातक घटना से पहले और बाद में भारत-चीन टकराव, चीनी कार्रवाई के प्रति भारत की समग्र प्रतिक्रिया का दिलचस्प विवरण दिया. उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घटे इस वाकये के दौरान की दास्तान सामने रखी. जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 सैन्यकर्मियों की मौत को याद करते हुए नरवणे कहते हैं, ''यह मेरे पूरे करियर के सबसे दुखद दिनों में से एक था.''
अगले महीने बाजार में आएगी किताब 31 दिसंबर, 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक सेना प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल मुख्य रूप से विवादित सीमा पर चीनी चुनौतियों के साथ-साथ फोर्स की लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक सुधार उपायों को लागू करने के तौर पर था. नरवणे लिखते हैं, कि "16 जून चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जन्मदिन है. यह ऐसा दिन नहीं है जिसे वह जल्द ही भूल जाएंगे. दो दशकों में पहली बार, चीनी और पीएलए को घातक हताहतों का सामना करना पड़ा." किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अगले महीने बाजार में आएगी.
सीमा की स्थिति पर डाला प्रकाश सीमा पर समग्र स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, नरवणे ने समग्र सीमा विवाद के निपटारे तक दोनों देशों के बीच "गैर-आक्रामकता" समझौते का सुझाव देते हुए कहा कि यह विश्वास बहाल करने और सेनाओं को डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन का रास्ता देने में बहुत मदद करेगा. गलवान घाटी की घटना पर, नरवणे का कहना है कि यह चीनी पीएलए द्वारा पेट्रोलिंग पॉइंट 14 (पीपी-14) में लगाए गए दो टेंटों को हटाने से इनकार करने के कारण हुआ, प्रतिद्वंद्वी के इनकार के बाद, उसी सामान्य क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपने टेंट लगाने का फैसला किया.

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