
सोची-समझी साजिश थी टिल्लू ताजपुरिया का मर्डर! तिहाड़ के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, वार्डन का खुफिया कैमरे पर बड़ा खुलासा
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2 मई... तिहाड़ जेल के अंदर हुए टिल्लू ताजपुरिया के मर्डर ने पूरे देश के लोगों को हिलाकर रख दिया था. क्योंकि दावा किया जाता है कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, लेकिन एक चर्चित गैंगस्टर का यू कत्ल हो जाना किसी के गले नहीं उतर रहा था. इस हत्याकांड के बाद आजतक ने तिहाड़ जेल पहुंचकर एक्सक्लूसिव पड़ताल की, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ. जानने के लिए पढ़िए रिपोर्ट...
तिहाड़ जेल का नाम सुनते ही सबके दिमाग में ऐसी इमेज बनती है, जहां देश के नामी और खूंखार अपराधी कैद हैं. इतना सख्त पहरा है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता. लेकिन 2 मई को तिहाड़ जेल के अंदर हुए गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया के मर्डर ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए. इस हत्याकांड के बाद जेल से बाहर आई तस्वीरों ने पूरे देश को दहला दिया.
टिल्लू की हत्या ने सबको इसलिए भी चौंका दिया, क्योंकि तिहाड़ जेल के अंदर चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. अब सवाल यह है कि इतनी हाईटेक सुरक्षा के बीच तिहाड़ के हाई सिक्योरिटी सेल में कैद टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कैसे हो गई? टिल्लू की हत्या के बाद मचे बवाल ने जेल प्रशासन को एक्शन लेने के लिए मजबूर कर दिया.
आठ कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया और 179 का ट्रांसफर हुआ, लेकिन इसके बाद भी यह सवाल जस का तस है कि आखिर जेल के अंदर इतनी आसानी से टिल्लू को कैसे मार दिया गया. इसकी सच्चाई जानने के लिए आजतक की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने तिहाड़ के अंदर तहकीकात की. आइए जानते हैं की इस पड़ताल में क्या सामने आया.
तहकीकात के लिए आजतक की अंडरकवर टीम ने जेल के असिस्टेंट सुपिंटेंडेंट जेल सोम प्रकाश त्यागी से मुलाकात की. दो मई को टिल्लू के सेल की सुरक्षा का जिम्मा त्यागी के कंधों पर ही था. उन्होंने आजतक के खुफिया कैमरे पर खुलासा किया कि तिहाड़ जेल प्रशासन की मिलीभगत के बिना जेल के अंदर टिल्लू ताजपुरिया की हत्या मुमकिन नहीं है.
क्या सोची समझी साजिश था हत्याकांड?
बातचीत के दौरान त्यागी ने अपने साथी अफसर की नियत पर पृश्न चिन्ह लगाया. उन्होंने इशारा किया कि उनके साथी ने बहाना बनाकर अचानक छुट्टी ले ली. हकीकत में हत्याकांड प्लाटेंड और स्क्रिप्टेड होने का दावा भी किया. यानी सोची-समझी साजिश के तरह एक दिन के लिए उन्हें टिल्लू के वार्ड का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया, जबकि उनका साथी अफसर जेल में ही मौजूद था.

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