
सूरत: कोरोना की मार के बीच बढ़े मदद के हाथ, खड़े किए ऑक्सीजन बेड वाले अस्पताल
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सूरत के पर्वत गांव इलाके में नगर निगम के कम्युनिटी हॉल में बीजेपी के स्थानीय पार्षद, अग्रवाल समाज और गौ पुत्र मित्र मंडल की ओर से 100 बेड का नमो कोविड आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है.
गुजरात में भी कोविड-19 संक्रमण ने विकराल रूप धारण कर रखा है. अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा जैसे अहम शहरों का हाल बुरा है. अस्पतालों में बेड से लेकर श्मशान में अंतिम संस्कार तक के लिए वेटिंग की स्थिति है. संक्रमण के आंकड़े हर दिन राज्य में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं. शनिवार से रविवार तक सूरत में कोरोना के 1700 नए केस आ चुके थे और इसी दौरान 26 लोगों की मौत हुई. ऐसी स्थिति में सूरत के तमाम वर्गों से जरूरतमंदों के लिए मदद के हाथ आगे आ रहे हैं. इसी के तहत सामाजिक संगठनों और व्यापार जगत से जुड़े लोगों ने इस महामारी के खिलाफ मुहिम छेड़ते हुए मुफ्त आइसोलेशन सेंटर बनाने की मुहिम शुरू कर दी है. इस काम में राजनीतिक दलों से भी सहयोग मिल रहा है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









