
'साइबर स्लेवरी' सिंडिकेट का पर्दाफाश... CBI ने मानव तस्करी के आरोप में 2 लोगों को किया गिरफ्तार
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थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक पहुंचाए जा रहे भारतीय नौजवान. झूठे वादों के जाल में फंसकर बन रहे हैं 'साइबर गुलाम'. सीबीआई ने मानव तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. राजस्थान और गुजरात से युवाओं को फंसाने वाले दो एजेंटों की गिरफ्तारी भी हुई है.
म्यांमार में बैठे साइबर ठगों का खेल अब भारत तक आ पहुंचा है. झूठे सपनों के सहारे युवाओं को साइबर अपराध के अड्डों तक पहुंचाने वाले दो एजेंटों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है. राजस्थान और गुजरात से कई युवाओं को विदेशी नौकरी का लालच देकर म्यांमार पहुंचाया गया. यहां उनको बंधक बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी कराई जाती थी. आरोपी एजेंटों की पहचान सोयल अख्तर और मोहित गिरी के रूप में हुई है.
सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि ये दोनों आरोपी विदेश से लौट रहे थे. उन्हें भारत पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया. जांच में सामने आया कि दोनों ने राजस्थान और गुजरात से युवाओं को थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक भेजा, जहां उन्हें साइबर अपराध के लिए मजबूर किया गया. ये मामले मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है.
जांच एजेंसी ने कहा कि पीड़ितों को केंद्र सरकार के प्रयासों से म्यांमार से वापस लाया गया था. उनकी मदद से ही एजेंटों की पहचान की गई. शुरुआती जांच में पता चला कि भोले-भाले भारतीयों को नौकरी के झूठे ऑफर देकर थाईलैंड के रास्ते म्यांमार भेजा जा रहा था. वहां विदेशी ठग उन्हें बंधक बनाकर 'डिजिटल अरेस्ट'. ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और लव स्कैम्स जैसी साइबर क्राइम की गतिविधियों में झोंक देते थे.
इनके जरिए भारतीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था. सीबीआई ने कहा, "एक संगठित इंटरनेशनल सिंडिकेट युवाओं को आकर्षक रोजगार और बड़े पैकेज का झांसा देकर बाहर भेजता है. विदेश पहुंचने के बाद उन्हें म्यांमार के परिसरों में बंदी बना लिया जाता है. वहां उन्हें धमकाया जाता है. पीटा जाता है. उनकी इच्छा के विरुद्ध साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है."
इन फंसे हुए युवाओं को 'साइबर गुलाम' कहा जाता है. ऐसे लोग जिन्हें टेक्नोलॉजी की दुनिया में आधुनिक गुलामी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्हें हर दिन ठगी के कॉल करने, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट साइट्स पर झूठे वादे करने और निर्दोष नागरिकों को लूटने के आदेश दिए जाते थे. सीबीआई ने इस पूरे नेटवर्क को 21वीं सदी का साइबर तस्करी रैकेट बताया है, जो बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता है.
भारत में ऐसे कई एजेंट सक्रिय हैं, जो खुद को जॉब कंसल्टेंट या इंटरनेशनल प्लेसमेंट एजेंट बताकर युवाओं को बहलाते हैं. ब तक कई ऐसे पीड़ित सामने आ चुके हैं, जिन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से थाईलैंड में नौकरी का प्रस्ताव मिला था. लेकिन असलियत में वहां से उन्हें म्यांमार भेज दिया गया और बंदी बनाकर काम कराया गया. सीबीआई ने ऐसे लोगों से युवाओं को बचने की अपील की है.

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