
सरफराज की जर्सी नंबर 97 का पिता के नाम से खास कनेक्शन... Exclusive इंटरव्यू में नौशाद खान ने बताया कितना कठिन था बेटे का सफर
AajTak
क्रिकेटर सरफराज के पिता नौशाद ने बताया कि बेटे को जानबूझकर रात में भूखा सुलाया. घर में मोटरसाइकिल होने के बाद भी ट्रेन से सफर करने के लिए कहा. इतना बड़ा किटबैग ट्रेन में ले जाना, जल्द आउट होने पर उन्हें कैसा फील होता, यह सब उसे सिखाना था. यह सब ट्रेनिंग का हिस्सा था.
आजमगढ़ के सरफराज खान भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 311वें खिलाड़ी बन गए हैं. राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ प्लेइंग इलेवन में शामिल हुए सरफराज को महान क्रिकेटर अनिल कुंबले ने टेस्ट कैप पहनाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्वागत किया. इस पर उनके पिता नौशाद खान भावुक हो गए. सरफराज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में ही अर्धशतक (62) जड़कर दुनिया को अपने होने का अहसास कराया.
सरफराज खान के पैतृक गांव बासूपार में खुशियों का माहौल है. गांव वाले सरफराज की सफलता से बेहद खुश हैं. सरफराज खान के परिवार के करीबियों का कहना है कि सरफराज के पिता ने काफी मेहनत की. उसी का ही परिणाम है कि आज सरफराज को सफलता मिली है. पिता नौशाद खान ने कहा कि बीसीसीआई सचिव जय शाह ने उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया था कि सरफराज भारत के लिए जरूर खेलेगा. उन्हें कभी भी ऐसा नहीं लगा कि वो किसी दूसरे धर्म से आते हैं.
नौशाद बोले- ऐसा लगा जैसे टेस्ट कैप मुझे मिली है
सरफराज के पिता नौशाद ने आजतक से खास बातचीत में बताया कि जबसे बेटे ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था. तब से यही सोचा था कि अपनी जिंदगी में जो मैं नहीं कर पाया वो बस सरफराज कर ले. लोग उसके नाम से मुझे जानें, जब उसने टेस्ट कैप पहनी तो ऐसा लगा कि कैप मैंने पहनी है. उसे क्रिकेटर बनाने में पूरे घर ने बड़ी महनत की.
बचपन से एक रूटीन बना हुआ था, न कभी उसने गोटियों खेली न पतंग उड़ाई. दोस्तों के साथ भी इधर-उधर नहीं घूमा. सुबह 4 उठकर उसकी मां खाना बनाकर देती थी और वीटी प्रैक्टिस करने निकल जाते थे. फिर घर आकर प्रैक्टिस करते थे यह रूटीन कई सालों से चल रहा था. कभी अच्छा खेल रहा था तो कभी नहीं. बस फोकस के साथ अपने काम में लगे हुए थे. जब कैप मिली तो ऐसा लगा वो सपना पूरा हो गया.
ऐसा लगा जो बच्चे अपना घर छोड़कर मेहनत कर रहे हैं, उनका सपना पूरा हुआ है. मैदान पर न पीने का पानी न बाथरूम होता है. आजाद मैदान पर इन सुविधा को लेने के लिए पैसे देने होते हैं. इस जगह से यशसवी जायसवाल, पृथ्वी शॉ उससे पहले सचिन और विनोद कांबली भी निकले. आज सबकी दुआओं से सरफराज भी वहां पहुंचा है.

Gautam Gambhir Visit Maa Baglamukhi Temple Nalkheda: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे. न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में होने वाले निर्णायक मुकाबले से पहले गंभीर का यह दौरा 'विजय' और 'आस्था' के संगम के रूप में देखा जा रहा है.












