
'सचिन तेंदुलकर ने 10 बार 99...', राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान क्यों बोले खड़गे?
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संसद के चालूू शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में संविधान पर चर्चा हो रही है. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए सत्ता पक्ष को जमकर घेरा. उन्होंने सदन में सचिन तेंदुलकर का भी जिक्र किया.
राज्यसभा में सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संविधान पर चर्चा की शुरुआत की. वित्त मंत्री ने पहले संविधान संशोधन से लेकर मजरूह सुल्तानपुरी और बलराज सहनी की गिरफ्तारी, किस्सा कुर्सी का फिल्म की रिलीज पर रोक तक का उल्लेख कर कांग्रेस को घेरा. वित्त मंत्री ने संविधान पर चर्चा की शुरुआत करते हुए 79 मिनट तक अपनी बात रखी. इसके बाद विपक्ष की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे ने बोलना शुरू किया. खड़गे ने 1951 के पहले संविधान संशोधन से लेकर संविधान निर्माण में कांग्रेस के योगदान तक गिनाए और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का भी जिक्र किया.
मल्लिकार्जुन खड़गे जब बोल रहे थे, उन्होंने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि सर इधर देखिएगा. इस पर सभापति धनखड़ ने कहा कि 99 परसेंट आपको ही देख रहा हूं. खड़गे ने कहा कि एक परसेंट से ही सब हो जाता है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने सचिन तेंदुलकर का जिक्र करते हुए कहा कि सचिन ने 10 बार 99 किया लेकिन एक के लिए सौ नहीं हो सका. इस पर विपक्ष से लेकर ट्रेजरी बेंच तक के सदस्यों ने ठहाके लगाए और सभापति जगदीप धनखड़ भी मुस्कराते नजर आए.
उन्होंने कहा कि नेहरू, आंबेडकर की ही देन है कि मोदीजी प्रधानमंत्री बन सके और मजदूर का बेटा विपक्ष का नेता बन सका. जब देश आजाद हुआ तब यहां सुई भी नहीं बनती थी. खड़गे ने नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि पीएम के असत्य आरोपों से इतिहास नहीं बदल जाएगा. असत्य बातों को सही बोलकर बताने की कोशिश की गई. हम डरने वाले नहीं हैं. उत्तर को प्रत्युत्तर देंगे और सत्यता पर आधारित देंगे.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के समय बांग्लादेश की आजादी का जिक्र किया और कहा कि एक लाख लोगों को बंदी बनाना आसान काम नहीं. लेकिन आयरन लेडी इंदिरा गांधी ने बता दिया कि हमारे करीब आए तो खैर नहीं. उन्होंने वित्त मंत्री पर तंज करते हुए कहा कि हम तो म्यूनिसिपैलिटी स्कूल में पढ़े हैं, वे जेएनयू में पढ़े हैं. अंग्रेजी भी अच्छी हो सकती है उनकी लेकिन करतूत अच्छी नहीं है. खड़गे ने अहमद फराज की शायरी 'तुम खंजर क्यों लहराते हो...' के जरिये सरकार पर तंज किया.
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उन्होंने कहा कि जो लोग झंडे से, अशोक चक्र से, संविधान से नफरत करते हैं, ये लोग आज हमको पाठ पढ़ा रहे हैं. संविधान जब बना, उस वक्त इन लोगों ने संविधान जलाया, रामलीला मैदान में नेहरू, बाबासाहब और महात्मा गांधी का पुतला जलाया. खड़गे ने एक किताब भी दिखाई और कहा कि संविधान बनने के बाद आप लोगों ने कैसी-कैसी बातें इसके बारे में बोली हैं. इस पर ट्रेजरी बेंच की ओर से यील्ड करने की मांग की जिसे खड़गे ने नकार दिया. फिर सभापति ने कहा कि जो किताब आपने दिखाई है, उसे मैं पढ़ूंगा. बाद में दे दीजिएगा. खड़गे ने कहा कि अभी ले लीजिए, पढ़ के दे दीजिएगा. क्योंकि ये किताब आजकल मिलती नहीं.

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