
संदेशखाली की ग्राउंड रिपोर्ट, महिलाओं के आरोप, बीजेपी-टीएमसी की सियासी जंग और गवर्नर की SIT... 10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला
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पश्चिम बंगाल का संदेशखाली सुर्खियों में बना हुआ है. यहां की महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके गुर्गों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. उन्होंने पुलिस पर भी आरोपियों से सांठ-गांठ के आरोप लगाए, जिसको लेकर बीजेपी भी सड़कों पर उतर गई और बीेजपी प्रदेश अध्यक्ष संदेशखाली पहुंच गए, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं संग प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें सुकांता जख्मी हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में बीते कुछ दिनों से तनाव का माहौल है. यहां महिलाओं ने टीएमसी नेताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और जब उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उनके खिलाफ महिलाओं ने प्रदर्शन भी किया था. उसके बाद ये मामला सड़क से लेकर विधानसभा तक गूंजा, अब इसको लेकर बीजेपी-टीएमसी के बीच सियासी जंग जारी है. इसके अलावा राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपकर एक एसआईटी भी बना दी है. संदेशखाली का पूरा मामला क्या है, आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं.
1- उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में स्थानीय महिलाओं ने शाहजहां शेख समेत टीएमसी के कई नेताओं पर यौन उत्पीड़न और जमीन के बड़े हिस्से पर बलपूर्वक कब्जा करने के आरोप लगाए हैं. इस आरोप के बाद शाहजहां के समर्थक सड़कों पर भी उतरे, जिससे तनाव और बढ़ गया. संदेशखाली में हिंसा की शिकार हुई एक महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस शाहजहां शेख और उसके साथियों को कभी गिरफ्तार नहीं करेगी.
2- संदेशखाली की महिलाओं ने बताया कि बलात्कार को साबित करने के लिए हमसे मेडिकल रिपोर्ट मांगी जा रही है. गांव की महिलाएं कैसे आगे आकर कह सकती हैं कि उनके साथ बलात्कार हुआ है? उन्होंने कहा कि हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है. हमने चुनाव के बाद से सांसद नुसरत जहां को नहीं देखा है. महिलाओं ने आरोप लगाया कि जिला परिषद का सदस्य शेख शाहजहां मुख्य अपराधी है. वे हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं, यहां की महिलाएं सुरक्षित नहीं रह सकतीं. हम महिलाओं को बाहर जाने से डर लगता है. हम सुरक्षा चाहते हैं. वे (आरोपी) महिलाओं को पार्टी (टीएमसी) कार्यालय में ले जाते थे और सुबह उन्हें छोड़ देते थे.
3- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने संदेशखाली को लेकर अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है. उन्होंने सोमवार को अशांत इलाके का दौरा किया था और आंदोलनकारियों से बात की थी. इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन कर दिया है. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में शाहजहां शेख और उसके साथियों का भी नाम लिया है. उन्होंने कहा कि पुलिस उपद्रवियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बजाय स्थानीय लोगों को उनके साथ समझौता करने के लिए निर्देश देती है, जबकि पुलिस की वर्दी में गुंडे रात में पीड़ितों के घर में घुस जाते हैं. रिपोर्ट में गुंडों की गिरफ्तारी, पीड़ितों की मदद और दोषी अधिकारियों का ट्रांसफर करने का सुझाव दिया है.
4- राज्यपाल सीवी आनंद बोस की रिपोर्ट को लेकर टीएमसी ने उनकी आलोचना की. टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने उन पर पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाया. राज्यपाल का बयान पूरी तरह निराधार, पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित है. अगर राज्यपाल को सही स्थिति जाननी थी तो उन्हें प्रशासन से बात करनी चाहिए थी, लेकिन वो अपना बयान बीजेपी और सीपीएम द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दे रहे हैं. टीएमसी नेता ने कहा कि यह सही नहीं है. फिर उन्हें चोपड़ा का दौरा करना चाहिए जहां बीएसएफ की लापरवाही के कारण 4 बच्चों की मौत हो गई थी. संदेशखाली में जो कुछ हुआ वह सरकार के खिलाफ आक्रोश नहीं था. यह एक या दो व्यक्तियों के ख़िलाफ़ आक्रोश था, लेकिन वहां एक अनुमानित अभियान चल रहा है.
5- संदेशखाली घटना की जांच के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में बनाई गई इस कमेटी में प्रतिमा भौमिक, बीजेपी सांसद सुनीता दुग्गल, कविता पाटीदार, संगीता यादव और बृजलाल शामिल हैं. यह कमेटी घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लेंगे और पीड़ितों से बात करेंगे. जांच के बाद ये कमेटी अपनी रिपोर्ट बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेंगे.

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