
शादी से इनकार, एसिड अटैक और बीस साल इंतजार... दिल दहला देगी रुकैया की ये दर्दभरी दास्तान
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तेजाबी हमला करने के गुनहगारों को कत्ल के बराबर की सजा यानी आजीवन कारावास तक दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद कई बार ऐसा होता है, जब सिस्टम से उलझ कर या हालात से हार कर तेजाब की टीस झेलनेवाली कुछ लड़कियां भी इंसाफ से महरूम रह जाती हैं.
कहते हैं नफरत की शक्ल में जब तेजाब की तपन किसी के जिस्म में पड़ती है, तो ये जिस्म के साथ-साथ रूह को भी छलनी कर जाती है. खाल के साथ-साथ तेजाब का शिकार बनने वाले की आत्मा भी गलने लगती है. तभी तो तेजाब की टीस से बेगुनाहों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक ने सख्त कायदे कानून बना रखे हैं. यहां तक कि किसी पर तेजाबी हमला करने के गुनहगारों को कत्ल के बराबर की सजा यानी आजीवन कारावास तक दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन इतना सबकुछ होने के बावजूद कई बार ऐसा होता है, जब सिस्टम से उलझ कर या हालात से हार कर तेजाब की टीस झेलने वाली कुछ लड़कियां भी इंसाफ से महरूम रह जाती हैं. ये कहानी है कुछ ऐसी ही एक लड़की रुकैया की.
कौन है रुकैया? 34 साल की रुकैया आगरा के शीरोज हैंगआउट कैफे में काम करती हैं. वो एक ऐसा कैफे है, जिसमें काम करने वाले सभी लोग एसिड अटैक सरवाइवर हैं. एसिड अटैक सरवाइवर यानी तेजाबी हमला झेल कर भी बच निकलने वाले लोग. तेजाबी हमले की टीस से उबर कर रुकैया अब अपनी जिंदगी में आगे तो बढ़ने लगी है, लेकिन सच्चाई यही है कि रुकैया के साथ हुए एसिड अटैक के वाकये को 20 सालों का लंबा वक्त गुजरने के बावजूद उसे अब भी इंसाफ का इंतज़ार है.
इंसाफ की उम्मीद ये और बात है कि अब ये इंतज़ार ख़त्म होने की उम्मीद बंधने लगी है, क्योंकि इंसान आम तौर पर इंसाफ की आस में जिस पुलिस के पास जाता है, वही पुलिस अब रुकैया को इंसाफ दिलाने खुद उसके दरवाजे पर आ खड़ी है. रुकैया पर हुए तेजाबी हमले और उसके 20 सालों के दर्द को समझने के लिए हमें इस कहानी को शुरू से समझने की जरुरत है.
6 दिसंबर 2022 यही वो तारीख थी, जब आगरा जोन के एडीजी राजीव कृष्ण आगरा शहर के शीरोज कैफे पहुंचे थे. वो कैफे में कुछ एसिड सरवाइवर से बातचीत कर रहे थे, उनका हाल-चाल ले रहे थे. इसी बीच उन्हें पता चलता है कि कैफे में रुकैया और उस जैसी कई और ऐसी लड़कियां हैं, जो एसिड सरवाइवर होने के बावजूद सालों से इंसाफ की राह तक रही हैं. इन लड़कियों की इन कहानियों ने पुलिस की वर्दी के अंदर छुपे एक संवेदनशील इंसान को मानो झिंझोड कर रख दिया.
पीड़िताओं को इंसाफ दिलाने का फैसला ये वो एसिड सरवाइवर थीं, जिन्होंने अपने परिवार के दबाव में या फिर किसी दूसरी वजह से अब तक इंसाफ के लिए पुलिस में शिकायत ही नहीं की थी. यानी जिस तेजाब ने उनकी हंसती खेलती जिंदगी झुलसा कर रख दी, इन लड़कियों ने उसी तेजाबी हमले को अंजाम देनेवाले गुनहगारों का हिसाब तक करने की हिम्मत तक नहीं जुटाई और तभी उन्होंने ये फैसला कर लिया कि अब वो ऐसी लड़कियों को इंसाफ दिला कर रहेंगे.
ADG ने पुलिस कमिश्नर को दिया आदेश एडीजी राजीव कृष्ण ने रुकैया की कहानी सुनने के बाद फौरन ही आगरा के पुलिस कमिश्नर डॉ प्रीतिंदर सिंह से बात की. रुकैया और बाकी लड़कियों को इंसाफ दिलाने का हुक्म दिया. तब पुलिस कमिश्नर ने इन लड़कियों को अपने दफ्तर में बुलाया, उनकी कहानी सुनी और अपने मातहत पुलिस अफसरों को इस सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने का हुक्म दिया. रुकैया की जिस दर्द भरी कहानी ने बड़े से बड़े और धाकड़ पुलिस अफसरों को भी हिला कर रख दिया, उसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

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