
विदेशी बॉस और देसी मैडम… बड़ा तगड़ा है 262 करोड़ की ड्रग सप्लाई का नेटवर्क, जानें कैसे मिला लिंक
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दिल्ली–एनसीआर में NCB ने एक बड़े सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया. फार्महाउस पर शुरू हुई एक साधारण रेड से मिले डिजिटल क्लू ने एजेंसी को 25 वर्षीय शेन वारिस तक पहुंचाया, जो विदेशी बॉस के निर्देशों पर फर्जी सिम और एन्क्रिप्टेड ऐप से नेटवर्क चला रहा था. पूछताछ में खुलासों ने पूरे रैकेट की परतें खोल दीं, जिसके जरिए 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग बरामद हुई.
दिल्ली–एनसीआर के बीचों-बीच चल रहे एक हाई-प्रोफाइल सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क की परतें उस वक्त खुलनी शुरू हुईं, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दिल्ली के एक फार्महाउस पर रेड मारी. किसी भी रूटीन छापे की तरह शुरू हुए इस ऑपरेशन में ऐसे क्लू मिले जिससे आगे चलकर 200 करोड़ से ज्यादा की ड्रग पकड़ी गई.
अधिकारियों के मुताबिक यह केस सिर्फ ड्रग पकड़ने का नहीं है बल्कि एक ऐसे अदृश्य नेटवर्क को उजागर करने का है, जिसे विदेशी ऑपरेटर अपने भारतीय ग्राउंड स्टाफ के जरिए रिमोट से कंट्रोल कर रहे थे. और इस नेटवर्क के बीचोबीच खड़ा था एक 25 साल का युवक शेन वारिस जो खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताता रहा, लेकिन अंदर से इस पूरे रैकेट का भरोसेमंद रनर मिला.
वो लिंक जिसने सबकुछ बदल दिया
NCB की शुरुआती इनपुट के आधार पर दिल्ली के जिस फार्महाउस में छापा मारा गया, वहां से तत्काल कोई बड़ा कंसाइनमेंट नहीं मिला, लेकिन एजेंसियों को एक अहम डिजिटल ट्रेल हाथ लगी.कुछ नंबर, कुछ एन्क्रिप्टेड चैट्स और कुछ ऐसे कोडवर्ड्स जिनका मतलब समझने में टीम को दो दिन लगे. यहीं से ऑपरेशन ने मजबूती पकड़ी. और तीसरे दिन, NCB की नज़रें एक नाम पर जाकर टिक गईं शेन वारिस, निवासी अमरोहा, फिलहाल सेक्टर-5 नोएडा में किराए के चौथे माले पर रहने वाला.
एक बॉस जो भारत में नहीं था
जब NCB की टीम 20 नवंबर 2025 की सुबह शेन के दरवाजे पर पहुंची, तो वह घबराहट छिपा नहीं पाया. गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ ही बेहद चौंकाने वाली निकली. शेन ने स्वीकार किया कि वह न सिर्फ ड्रग पैकेट रिसीव और मूव करता था बल्कि पूरी तरह अपने बॉस के निर्देशों पर चलता था. एक ऐसा बॉस जो देश में नहीं था, लेकिन हर मिनट की गतिविधि पर निगाह रखता था. शेन ने बताया कि वह फर्जी सिम कार्ड इस्तेमाल करता था बातचीत व्हाट्सऐप और Zangi जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप पर होती थी सभी निर्देश कोडवर्ड में आते थे हर मूवमेंट का वीडियो/फोटो बॉस को भेजना अनिवार्य था. पूरी बातचीत ऐसे चलती थी मानो कोई वीडियो गेम का रिमोट कंट्रोलर विदेश से भारत में मौजूद चरित्र को चला रहा हो.

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