
वाराणसी: गंगा में नाव पर इफ़्तार के लिए गिरफ़्तार 14 मुस्लिम युवकों की ज़मानत याचिका ख़ारिज
The Wire
वाराणसी की एक अदालत ने बीते सप्ताह भाजयुमो नेता की शिकायत के आधार पर गिरफ़्तार 14 मुस्लिम युवकोंं की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है. इन युवकों पर गंगा नदी के बीच नाव पर ‘इफ्तार’ करने और कथित तौर पर बिरयानी खाकर हड्डियां नदी में फेंकने के आरोप सहित कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं.
नई दिल्ली: वाराणसी की एक अदालत ने सोमवार (23 मार्च) को गंगा नदी के बीच नाव पर ‘इफ्तार’ करने और कथित तौर पर बिरयानी खाकर हड्डियां नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार 14 मुस्लिम युवकोंं की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते सप्ताह 17 मार्च को भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष (वाराणसी) रजत जायसवाल की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने इन युवकों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था.
एफआईआर दर्ज करवाने वाले भाजयुमो पदाधिकारी का कहना था, ‘मुस्लिम युवकों द्वारा जिस तरह से गंगा जी में मांस का सेवन किया गया है… यह हम सभी सनातन धर्म के अनुयायियों को बर्दाश्त नहीं है. हम इसका सख्त विरोध करते हैं.’
बार एंड बेंच ने बताया कि सुनवाई को दौरान अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित यादव ने अपने आदेश में कहा कि ‘आरोपियों द्वारा किए गए अपराध गंभीर प्रकृति के और गैर-जमानती हैं’, जिसके चलते उन्हें जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं.
इस संबंध में पुलिस ने पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, शत्रुता को बढ़ावा देने, सार्वजनिक जलस्रोत या जलाशय के पानी को प्रदूषित करने, सार्वजनिक उपद्रव करने और लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन करने से संबंधित धाराओं के साथ-साथ जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम की धारा 24 (जो किसी नदी या कुएं में प्रदूषक पदार्थ डालने पर रोक लगाती है) भी लगाई है.
इसके अलावा इस मामले में इन युवकों पर बाद में जबरन वसूली का केस भी दर्ज किया गया है.

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यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

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