
वामपंथी उग्रवाद की हिंसक घटनाओं में 77% की आई कमी, गृह मंत्रालय ने संसद में दिया जवाब
AajTak
वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़ी हिंसक घटनाओं और मौतों के मामले में गृह मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में जवाब देते हुए कहा है कि ऐसी घटनाएं में पहले से कहीं ज्यादा कमी आई है.
संसद में मंगलवार को 2018 से 2021 तक लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म यानी वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़ी हिंसक घटनाओं और मौतों का ब्यौरा मांगा गया था. साथ ही, यह सवाल भी किया गया था कि क्या सरकार ने स्वेच्छा से हथियार डालने वाले नक्सली विद्रोहियों को माफी देने का फैसला किया है. इसपर गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है.
देश में वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी हिंसक घटनाएं हुईं कम
संसद में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित जबाव देते हुए कहा है कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के मुताबिक, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था के विषय राज्य सरकारों के पास हैं. हालांकि, भारत सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों की मदद कर रही है. इसके लिए 2015 में राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना शुरू की गई थी. इस नीति की वजह से केरल राज्य सहित, पूरे देश में हिंसा की घटनाएं कम हुई हैं.
गृह मंत्रालय का कहना है कि वामपंथी उग्रवाद की हिंसक घटनाएं 2009 में 2258 पर थीं, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर था. ये घटनाएं 2021 में 509 पर आ गई हैं. इन घटनाओं में 77 प्रतिशत की कमी हुई है.
हिंसक घटनाओं में होने वाली मौतों में भी कमी
गृह मंत्रालय का कहना है कि इसी तरह इन घटनाओं में होने वाली मौतें, जिनमें नागरिक और सुरक्षा बल शामिल हैं, उनमें भी 85% की कमी आई है. 2010 में 1005 लोगों की मौत हुई थीं, जो 2021 में घटकर 147 हो गई हैं.

क्रिकेटर रिंकू सिंह लखनऊ में आयोजित समारोह में सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र लेने नहीं पहुंचे. रिंकू को क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी पद मिला है. इस समय वह आईपीएल की तैयारियों में जुटे हैं, जहां वे कोलकाता नाईट राइडर्स के लिए खेलते हैं. उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी का लेटर सौंपा और कई खिलाड़ियों को पुरस्कारों से सम्मानित किया.

फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मालिक कंपनी मेटा के लिए यह एक बड़ा झटका है. कंपनी ने हमेशा दावा किया है कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करती है, लेकिन न्यू मेक्सिको की जूरी ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. साथ ही दोषी करार देते हुए भारी भरकम जुर्माना लगाया है.

आज पूरी दुनिया में यही चर्चा है कि ईरान-अमेरिका युद्ध- रुकेगा या फिर महायुद्ध में बदल जाएगा. इस सवाल की वजह है युद्ध को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप का दावा. ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले की नई डेडलाइन का एलान किया, वो भी ये कहते हुए कि ईरान की तरफ से युद्धविराम की पेशकश की गई है और दोनों देशों के बीच टेबल पर बातचीत जारी हैं. लेकिन ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को झूठ का पुलिंदा बताया. अब सवाल यही है कि पर्दे के पीछे क्या ईरान और अमेरिका में कोई बातचीत चल रही है, क्या जल्द युद्धविराम की संभावना है, या फिर ट्रंप के दावे में कोई दम नहीं.










