
लखनऊ: उन्नाव में पंचायत चुनाव के बाद खूनी संघर्ष, 12 साल के लड़के की मौत, पांच घायल
AajTak
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद हुई हार जीत को लेकर अब रंजिश सामने आने लगी है. ऐसा ही वारदात हुई उन्नाव जिले के एक गांव में, जहां एक ही दो परिवार में हुए संघर्ष में 12 साल के बालक की जान चली गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे उन्नाव जिले में पंचायत चुनाव में हार जीत को लेकर दो परिवार में संघर्ष हो गया. अटवा गांव में हुए इस झगड़े में 12 साल के मासूम की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस के अनुसार गांव में प्रधानी का चुनाव जीतने वाली अनुराधा सिंह के पति रणधीर सिंह और उसकी प्रतिद्वंदी रहीं सीमा पाल के पति मनोज पाल के बीच ये विवाद शुरू हुआ. बताया गया है कि शुक्रवार की शाम जब गांव में बिजली नहीं थी, तभी रणधीर सिंह हारी हुईं प्रत्याशी सीमा पाल के घर पहुंच गए. आरोप है कि रणधीर सिंह ने लाठी डंडे से मनोज और उसके परिवारजनों के साथ मारपीट शुरू कर दी. बताया गया है कि इस दौरान परिवार की महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. मनोज पाल की मां के सिर पर रॉड से प्रहार किया गया. इसके बाद गोली चलाई गई, जो मनोज पाल के 12 वर्षीय भतीजे की पीठ में लगी.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









