
राष्ट्रीय बजरंग दल क्या है जिसपर बंदूक चलाने की ट्रेनिंग देने का लगा है आरोप? असली बजरंग दल से कितना अलग
AajTak
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें युवा हथियार चलाने की ट्रेनिंग लेते दिख रहे थे. ये वीडियो असल में असम में हुए राष्ट्रीय बजरंग दल के ट्रेनिंग कैम्प का था. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. ऐसे में जानते हैं कि ये राष्ट्रीय बजरंग दल क्या है?
असम पुलिस ने 'राष्ट्रीय बजरंग दल' के खिलाफ केस दर्ज किया है. राष्ट्रीय बजरंग दल पर युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने का आरोप है.
दरअसल, 24 से 30 जुलाई के असम के दरांग जिले में राष्ट्रीय बजरंग दल ने ट्रेनिंग कैम्प का आयोजन किया था. इस कैम्प में 18 से 30 साल के युवा शामिल हुए थे.
राष्ट्रीय बजरंग दल के असम शाखा के अध्यक्ष दिनेश कालिता ने दावा किया था कि इस कैम्प में असम के 28 जिलों से आए 400 से ज्यादा युवा शामिल हुए थे. इन्हें दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए तलवारबाजी, तीरंदाजी और बंदूक चलाने के साथ-साथ मार्शल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग दी गई थी.
इस ट्रेनिंग कैम्प का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया था. जिसके बाद बवाल बढ़ गया था. इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार से इस पर कार्रवाई करने की मांग की थी.
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 153A और 34 के तहत केस दर्ज कर लिया है. इसके साथ ही हेमंता पेयांग और रतन दास नाम के शख्स को हिरासत में भी ले लिया है.
पर ऐसे में सवाल उठता है कि अब तक तो बजरंग दल सुनने में आता था, लेकिन ये राष्ट्रीय बजरंग दल क्या है? ये जानने से पहले थोड़ा सा इतिहास में जाना होगा.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








