
राष्ट्रगान पर नीतीश कुमार का व्यवहार क्या इतना असामान्य है की उन्हें सीएम पद छोड़ देना चाहिए?
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यह सच है कि नीतीश कुमार को राष्ट्रगान के दौरान सतर्कना बरतनी चाहिए थी. पर इस छोटी सी बात को लेकर एक सम्मानित , उम्रदराज नेता को बीमार बताने की कोशिश की जा रही है. कहा जा रहा है कि उन्होंने राष्ट्रगान का अपमान किया है. करीब चार दशक से बिहार और देश की उनकी एकनिष्ठ सेवा को देखते हुए उनसे माफी की मांग करने वाले क्या खुद अपना अपमान कर रहे हैं?
बिहार विधानसभा में शुक्रवार को राष्ट्रगान के अपमान के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है. विधानसभा परिसर और सदन में इसे लेकर प्रदर्शन हुआ और विपक्ष ने सरकार विरोधी नारे लगाए. विपक्ष की मांग थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 140 करोड़ जनता से माफी मांगनी चाहिए. भाजपा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो मख्यमंत्री से तत्काल मुख्यमंत्री का पद छोड़ देने की मांग की .
आरजेडी मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और राबड़ी देवी ने भी इस मुद्दे पर नीतीश कुमार और बीजेपी को घेरने की कोशिश की. दरअसल नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान को शुरू होने से पहले रुकवा दिया. उन्होंने मंच से इशारों में कहा, 'पहले स्टेडियम का चक्कर लगाकर आते हैं, फिर शुरू कीजिएगा. नीतीश के आने के बाद राष्ट्रगान शुरू हुआ पर इस दौरान नीतीश हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करते रहे. प्रधान सचिव दीपक कुमार ने यह देखा तो उन्होंने हाथ देकर रोकना चाहा और उन्हें सावधान मुद्रा में रहने का इशारा किया, लेकिन वह तब भी नहीं माने और पत्रकारों की तरफ देखकर प्रणाम करने लगे. यह सच है कि नीतीश कुमार को राष्ट्रगान के दौरान सतर्कना बरतनी चाहिए थी. पर इस छोटी सी बात को लेकर एक सम्मानित , उम्रदराज नेता को बीमार बताने की कोशिश की जा रही है. कहा जा रहा है कि उन्होंने राष्ट्रगान का अपमान किया है. करीब चार दशक से बिहार और देश की उनकी एकनिष्ठ सेवा को देखते हुए उनसे माफी की मांग करने वाले खुद अपना अपमान कर रहे हैं.
लिविंग लीजेंड बन चुके नीतीश कुमार से इस्तीफा मांगना
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार उस स्थान को प्राप्त कर चुके हैं जहां पहुंचने का नसीब विरलों को ही मिलता है. फिलहाल देश की समकालीन राजनीति में देखें तो अजातशत्रु कहलाने का दावा केवल नीतीश कुमार ही कर सकते हैं. खुद लालू परिवार आज चौतरफा नीतीश कुमार पर हमले कर रहा है. पर नीतीश कुमार का साथ पाने के लिए परिवार के लोग अलग विचार रखते हैं. नीतीश कुमार तमाम विरोध के बावजूद अपने विरोध के स्तर को कम से कम लालू परिवार के लिए बहुत निचले स्तर पर नहीं ले जाते हैं. जबकि आरजेडी के साथ गठबंधन खत्म होने के बाद एक दौर ऐसा था तेजस्वी कितने दिनों तक एक्स पर लगतार नीतीश के लिए बहुत ही अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते रहे.
नीतीश कुमार देश के एक मात्र ऐसे नेता हैं जिनके पक्ष और विपक्ष दोनों में बराबर शुभचिंतक हैं. एनडीए के खिलाफ इंडिया गठबंधन को धरातल पर लाने का श्रेय उन्हें ही जाता है. जब से नीतीश कुमार ने इंडिया गुट को छोड़ा तब से लगातार यह गठबंधन कमजोर होता गया.यह नीतीश के व्यक्तित्व का ही कमाल है कि सिर्फ 2 परसेंट सजातीय वोट के साथ वे बिहार की राजनीति में 3 दशकों से सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बने हुए हैं. एक ऐसे शख्स से केवल इसलिए इस्तीफ मांगना हास्यास्पद लगता है कि वे राष्ट्रगान के दौरान गलती से कुछ लोगों के अभिवादन का जवाब दे रहे थे. अगर उन्हें राष्ट्रगान की चिंता न होती या उसके प्रति सम्मान नहीं होता तो स्टेडियम का निरीक्षण करने जाने के पहले राष्ट्रगान करवाने के लिए थोड़ी देर और इंतजार करने के लिए क्यों कहते?
क्या नीतीश कुमार का कोई विकल्प है इस समय

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