
राम मंदिर पर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करने वाले 14 सपा विधायकों के नाम सार्वजनिक क्यों करना चाहती है भाजपा
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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर धन्यवाद प्रस्ताव का समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में विरोध किया. पर हैरानी वाली बात यह रही कि करीब 90 प्रतिशत सपा विधायकों ने योगी सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया. सवाल उठता है कि क्या अखिलेश अपनी पार्टी का मन नहीं पढ़ पा रहे हैं?
गोली चलवाने, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में न जाने, और अब विधानसभा में मंदिर पर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करने... समाजवादी पार्टी को घेरने के लिए अखिलेश यादव के नेता भाजपा को कोई न कोई बहाना दे ही देते हैं. खबर है कि सपा के 108 में से 14 विधायकों ने विधानसभा में राम मंदिर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध किया. भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि इनके नाम सार्वजनिक किये जाएं. यूपी बजट सत्र के तीसरे दिन 5 फरवरी को सदन में अपने अभिभाषण के दौरान डॉक्टर शलभमणि त्रिपाठी ने सपा को जमकर लताड़ लगाई. विधानसभा में उन्होंने कहा- 'राम मंदिर का आमंत्रण तो आप को भी मिला था पर आप अयोध्या नहीं गए. मैं बहुत हैरान हुआ कि जब आप लोग भगवान राम के आमंत्रण पर नहीं गए. आप लोगों ने भगवान राम के वजूद को नकार दिया था. आप लोगों के लिए पश्चाताप का आखिरी अवसर था. आज जब सदन में भगवान राम के नाम पर बधाई प्रस्ताव जा रहा था तब आप लोग चुप रह सकते थे लेकिन आपने विरोध शुरू कर दिया. मैं विधानसभा अध्यक्ष से मांग करता हूं कि उन 14 सपा नेताओं के नाम सार्वजनिक कीजिए जिन्होंने भगवान राम के नाम पर आए बधाई प्रस्ताव का विरोध किया है.'
दरअसल राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार की ओर से विधानसभा में बधाई प्रस्ताव पेश किया गया. इस प्रस्ताव का समाजवादी पार्टी के सदस्यों की ओर से आवाज आई कि यह जबरदस्ती की बधाई है. हालांकि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि कोई जबरदस्ती नहीं है, जो सहमत हों वही बधाई दें. प्रस्ताव पेश होने के बाद समाजवादी पार्टी के 14 सदस्यों ने इसके विरोध में हाथ नहीं उठाया.
1- मतदाता को भी पता चले कि उनके प्रतिनिधि उन 14 विधायकों में हैं या नहीं
दरअसल बीजेपी चाहती है कि ये नाम सामने आएं ताकि उनके मतदाताओं को भी पता चल सके उनके प्रतिनिधि राम मंदिर उद्घाटन में ही नहीं गए बल्कि धन्यवाद प्रस्ताव भी उन्हें मंजूर नहीं है.वैसे भी जनता को यह जानने का अधिकार है कि विधानसभा में पेश होने वाले प्रस्ताव का हमारे जनप्रतिनिधि का क्या रुख है. मतदाता अपने नेता के किए गए कार्यों के आधार पर ही उसे भविष्य में वोट देना है या नहीं देना है का फैसला लेता है.विधायक शलभ मणि ने aajtak.in से कहा कि जिन विधायकों ने सदन में भगवान राम के नाम का विरोध किया, अब वे नहीं चाहते कि उनका नाम सार्वजनिक हो, उन्हें पता है कि भगवान राम के खिलाफ वोट करके वे अपने क्षेत्र में जाएंगे तो लोग ही नहीं उनके परिवार वाले भी उनसे पूछेंगे कि आपने ऐसा क्यूँ किया. यही वजह है कि सपा विधायक ओमवेश जी ने तो प्रभु राम के खिलाफ दिया गया अपना वोट यह कहते हुए वापस ले लिया कि वे पक्के राम भक्त हैं. जो राम और राष्ट्र के साथ नहीं, देश उनके साथ नहीं खड़ा होगा.
2- राम के नाम पर सपा में हुई फूट को उजागर करना
बीजेपी चाहती है कि जिन लोगों ने राम मंदिर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध किया उनका नाम उजागर करने के बहाने जनता के बीच यह संदेश जाए कि समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव किस तरह अपनी मनमानी कर रहे हैं. जाहिर है कि राम मंदिर के नाम पर पार्टी 2 फाड़ हो चुकी है. धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सपा के 111 विधायक और रालोद के 8 विधायक सदन में मौजूद थे. प्रस्ताव आने के बाद सपा के 97 विधायकों ने योगी सरकार का समर्थन किया. महज 14 विधायकों ने विरोध करते हुए हाथ ऊपर नहीं किया. रालोद के विधायकों का भी समर्थन योगी सरकार को मिला. 14 विधायकों में से एक स्वामी ओमवेश ने अपना विरोध वापस ले लिया है, मतलब अब केवल 13 विधायक ही प्रस्ताव का विरोध करने वाले रह गए हैं. साफ है कि राम मंदिर के नाम पर पार्टी में कभी विधायक दल की बैठक नहीं हुई . या राममंदिर मुद्दे पर पार्टी को क्या स्टैंड लेना है इस पर भी पार्टी से सलाह नहीं ली गई. पार्टी पिछले 4 चुनावों से उत्तर प्रदेश में मुंह की इसी लिए खा रही है क्योंकि पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाया जा रहा है.

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