
देश को हर महीने चाहिए 30 LPG टैंकर... 6 होर्मुज में फंसे, कैसे होगी गैस सप्लाई?
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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण भारत के 6 से ज्यादा जहाज अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं. बताया जा रहा है कि इन जहाजों में ज्यादातर एलपीजी टैंकर और एलएनजी जहाज हैं. जिससे देश में एलपीजी की किल्लत हो सकती है. हालांकि, सरकार ने घरेलू उत्पादन में 40% वृद्धि की है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है.
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत की रसोई गैस आपूर्ति पर काले बादल मंडरा रहे हैं. हाल ही में शिवालिक और नंदा देवी जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंचे हैं, लेकिन अभी-भी भारत के छह से ज्यादा एलपीजी टैंकर और एलएनजी जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. वहीं, भारत जैसे विशाल देश की मासिक जरूरत को पूरा करने के लिए अभी-भी 24 से ज्यादा टैंकरों की दरकार है. इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा जहाजों की ट्रैकिंग डेटा (AIS सिग्नल) के विश्लेषण से ये जानकारी सामने आई है. वेसल-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जग वसंत, बीडब्ल्यू एल्म, बीडब्ल्यू लॉयल्टी, पाइन गैस, ग्रीन साणवी, जग विक्रम और ग्रीन आशा नामक ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास रुके हुए हैं. इन जहाजों में लगभग 3.38 लाख मीट्रिक टन एलपीजी मौजूद है जो भारत की मासिक आवश्यकता का लगभग पांचवां हिस्सा है. पिछले दो हफ्तों में केवल 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नामक दो टैंकर ही भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच पाए हैं. सरकार ने इस कमी को देखते हुए घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की है और होटलों के बजाय घरों के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है.
जहाज पर जरूरी सामान की कमी शिप-ट्रैकिंग डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से पांच बड़े जहाजों ने पिछले तीन दिनों से कोई हलचल नहीं दिखाई है. जग वसंत और पाइन गैस जैसे टैंकर होर्मुज के खतरनाक मोड़ (U-bend) से ठीक पहले लंगर डाले हुए हैं. दूसरी ओर, बीडब्ल्यू एल्म जैसे कुछ जहाज पश्चिम की ओर फारस की खाड़ी के अंदरूनी हिस्से में जा रहे हैं. संकट केवल ईंधन का ही नहीं है, बल्कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 611 नाविक भी इन हालातों में फंस गए हैं. इन जहाजों पर ईंधन और जरूरी सामान की आपूर्ति धीरे-धीरे कम हो रही है, जिससे वहां फंसे कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है.
भारत में गैस की मांग उधर, भारत की रसोई गैस की जरूरतें बहुत बड़ी हैं. पिछले साल देश में 33.15 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कुकिंग गैस की खपत हुई थी. इसमें से घरेलू उत्पादन केवल 12.8 MMT था, जबकि बाकी 18.5 MMT की पूर्ति आयात के जरिए की गई. इस मांग को पूरा करने के लिए साल भर में औसतन 400 से 450 जहाजों की जरूरत होती है, जिसका मतलब है कि हर महीने लगभग 34 से 38 टैंकर भारत आने चाहिए. हालांकि, युद्ध के कारण पिछले 15 दिनों में केवल दो टैंकर ही पहुंचे हैं जो भारत की महज एक या दो दिन की आपूर्ति को ही पूरा कर सकते हैं.
घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन और रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने बुधवार को ब्रीफिंग में बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई हैं.
वहीं, घरेलू उत्पदान में वृद्धि के बाद भारत का उत्पादन करीब 17.9 MMT तक ही पहुंच पाएगा. इसके बावजूद भी देश को लगभग 13.4 मिलियन टन गैस की जरूरत रहेगी और देश भर में लोगों के घरों में ईंधन की आपूर्ति के लिए हर महीने कम-से-कम 24 से 29 टैंकरों का आयात की जरूरत रहेगी.
कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, भारत के झंडे वाले टैंकरों में वर्तमान में 3 लाख मीट्रिक टन एलपीजी, 2 लाख मीट्रिक टन एलएनजी और 16.7 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल क्षेत्र में मौजूद है जो सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहा है. वहीं, सप्लाई चैन में आई इस बाधा के कारण सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. वर्तमान में कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति जो होटलों और रेस्टोरेंट्स को दी जाती है, उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. प्राथमिकता केवल घरेलू उपभोक्ताओं (हाउसहोल्ड्स) को दी जा रही है, ताकि आम जनता को भारी किल्लत का सामना न करना पड़े.

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