
राजस्थान: एनजीटी आदेश के बावजूद अरावली में जारी खनन के ख़िलाफ ग्रामीणों का संघर्ष 1200 दिनों से जारी
The Wire
राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ जिले के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार (23 मार्च) को कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक आदेश को लागू करने की मांग उठाई. ग्रामीणों का कहना है कि एनजीटी के 3 नवंबर 2025 के आदेश के बावजूद इलाके में लाइमस्टोन खनन, ब्लास्टिंग और स्टोन क्रशिंग का काम जारी है, जिससे उनके जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.
नई दिल्ली: उत्तरी राजस्थान के कोटपुतली-बहरोड़ क्षेत्र के जोधपुरा और आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार (23 मार्च) को कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के एक आदेश को लागू करने की मांग उठाई.
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत दिवस के मौके पर आयोजित इस प्रदर्शन में करीब 300 लोग शामिल हुए. अरावली पर्वतमाला में खनने के खिलाफ ग्रामीणों का यह संघर्ष पिछले 1200 दिनों से चल रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि एनजीटी के 3 नवंबर, 2025 के आदेश के बावजूद इलाके में लाइमस्टोन (चूना पत्थर) खनन, ब्लास्टिंग और स्टोन क्रशिंग का काम बदस्तूर जारी है, जिससे उनके जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.
यह मामला ‘जोधपुरा संघर्ष समिति बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य’ से जुड़ा है, जिसमें ग्रामीणों ने अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की खनन गतिविधियों के खिलाफ याचिका दायर की थी. 3 नवंबर 2025 को एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि मंदिर, स्कूल, घर और अन्य सार्वजनिक स्थानों से 500 मीटर के दायरे में ब्लास्टिंग नहीं होनी चाहिए, ताकि लोग और संपत्ति को नुकसान न पहुंचे. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इन निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है.
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश के पैरा 95(7) में विशेष रूप से ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया था. इसमें कहा गया कि परियोजना स्थल पर रात के समय ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण को नियंत्रित किया जाए, ताकि आसपास रहने वाले लोगों और जानवरों की जैविक दिनचर्या प्रभावित न हो और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर न पड़े.
इसके अलावा, एनजीटी ने राजस्थान सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग और संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश दिया था कि वे आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और किसी भी तरह के उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करें. ट्रिब्यूनल ने यह भी संकेत दिया था कि प्रभावित क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि खनन गतिविधियों से हो रहे नुकसान को रोका जा सके.

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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