
मोदी ‘सरनेम’ मामले में सज़ा के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता गई
The Wire
राहुल गांधी को बीते लोकसभा चुनाव में एक रैली में 'मोदी सरनेम' वालों के संबंध में की गई टिप्पणी को लेकर गुरुवार को सूरत की अदालत ने दो साल की सज़ा सुनाई थी. लोकसभा सचिवालय द्वारा शुक्रवार को कहा गया कि गांधी को सज़ा के दिन से सांसद के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया है.
नई दिल्ली: सूरत की एक अदालत द्वारा ‘मोदी सरनेम’ पर अपनी कथित टिप्पणी के लिए मानहानि के मामले में दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शुक्रवार को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया. मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन। They (BJP) tried all ways to disqualify him. They don’t want to keep those who are speaking the truth but we will continue to speak the truth. We’ll continue to demand JPC, If needed we’ll go to jail to save democracy: Cong president on Rahul Gandhi’s disqualification as MP pic.twitter.com/gEGySF4yIx The day Rahul Gandhi raised questions against Adani, PM, this type of conspiracy was started to silence Rahul Gandhi. It’s a clear case of anti-democratic, dictatorship attitude of BJP govt: Congress MP KC Venugopal pic.twitter.com/uxuFb1Fi5r
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि वायनाड सांसद गांधी को 23 मार्च 2023 से अयोग्य घोषित कर दिया गया है. – महात्मा गांधी — ANI (@ANI) March 24, 2023 — ANI (@ANI) March 24, 2023
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा 8(3) के अनुसार, यदि किसी सांसद को किसी अपराध का दोषी ठहराया जाता है और कम से कम दो साल की सजा सुनाई जाती है, तो वह अयोग्यता का पात्र होगा. — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 23, 2023
सजा को संभवत: सत्र न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, और फिर अगर जरूरत हुई तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी चुनौती दी जा सकती है. हालांकि, सजा का परिणाम यह भी हो सकता है कि गांधी अगले आठ सालों तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.

मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?

फरवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में ज़मानत देने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस पंकज भाटिया की आलोचना की थी. अब एक पड़ताल में सामने आया है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच जस्टिस भाटिया की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ ने दहेज संबंधित हत्या के 510 मामले सुने थे, जिनमें से 508 केस में उन्होंने आरोपी की ज़मानत मंज़ूर की.

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को बदलने का आदेश दिया है. नौकरशाही में इस फेरबदल के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने सोमवार को राज्यसभा से वॉकआउट किया.



