
मेडलों की नीलामी, दिल्ली के बॉर्डर फिर जाम... पहलवानों के समर्थन में महापंचायत ने दिए 5 प्रस्ताव
AajTak
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने पहलवानों के आंदोलन के अगले कदम पर चर्चा के लिए मुजफ्फरनगर के सोरम गांव में महापंचायत बुलाई थी. इस दौरान पांच प्रस्ताव रखे गए हैं. इसमें सर्वसम्मति से तय किया गया कि पहलवानों के समर्थन में देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा और दिल्ली की सीमाओं को एक बार फिर से जाम किया जाएगा.
पहलवानों के समर्थन में गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन ने मुजफ्फरनगर में महापंचायत की. इस दौरान BKU अध्यक्ष नरेश टिकैत ने एक बार फिर सरकार को अल्टीमेटम याद दिलाया और कहा कि 5 दिन बाद कुछ भी हो सकता है. इस दौरान महापंचायत में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से खाप नेता शामिल हुए. पंचायत में सर्वसम्मति से कुरुक्षेत्र में एक और महापंचायत बुलाए जाने की बात कही गई है. इसके साथ ही इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे गए हैं.
महापंचायत में रखे गए हैं ये प्रमुख प्रस्ताव पंचायत के दौरान ये प्रस्ताव रखा गया है कि पहलवान गंगा में पदक बहाने के बजाय इसे अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ के माध्यम से नीलाम करें.
खाप प्रमुखों की समिति का गठन किया जाए जो भविष्य में पहलवानों के विरोध के लिए मेन बॉडी के तौर पर कार्य करेगी.
एक प्रतिनिधि मंडल को तय किया जाएगा जो कि पहलवानों का पक्ष लेकर राष्ट्रपति और गृहमंत्री के पास जाएंगे और उनकी बात रखेंगे.
दिल्ली की सीमाओं को फिर से बंद किए जाने पर भी महापंचायत में सहमति बनी है.
देशव्यापी आंदोलन को खड़ा करने की तैयारी भी की जाएगी.

महायुद्ध के 19 दिन हो चुके हैं. मैं इस वक्त इजरायल के तेल अवीव में हूं. आज की रात महायुद्ध में बहुत गंभीर हो सकती है. क्योंकि महायुद्ध अब बेकाबू होने के मोड़ पर पहुंच सकता है. हमारा मकसद डराना नहीं है. ध्यान से इस बात को कहने की वजह समझिएगा. अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग में एक दूसरे पर ताबड़तोड़ वार-पलटवार हो रहे हैं. ताजा खबर ये है कि इजरायल ने ईरान की सबसे बड़े गैस ठिकाने पर हमला किया है. इजरायल ने ये हमला अमेरिका की मदद से किया है. जो दक्षिण पश्चिम ईरान में है.

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की NSA अजित डोभाल संग बैठक, डिफेंस-इंटेलिजेंस समेत कई मुद्दों पर हुई बात
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ बैठक की, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने डिफेंस, इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया.

ईरान अपने सुरक्षा प्रमुख की मौत के शोक में डूबा हुआ है और इंतकाम की कसमें खा रहा है. उधर इजरायल और अमेरिका इस उम्मीद में हैं कि उसने ईरान के तमाम बड़े नेता, कमांडर और प्रमुख मार दिए हैं, तो अब ईरान सरेंडर करेगा. लेकिन ईरान सरेंडर के मोड में नहीं है. इस बीच दुनिया हैरान है कि जब इजरायल और अमेरिका इतने हमले कर रहा है तो ईरान के सुरक्षा प्रमुख खुद को सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए. इजरायल ने कैसे अली लारीजानी को मारा.

जैसे जैसे अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान को निशाना बना रहे हैं उनके शहरों में धमाके कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी पलटवार कर रहा है. लेकिन आज सुबह इजरायली हमले के बाद बेरूत का रिहायशी इलाका कब्रगाह में बदल गया और चीख पुकार मचने लगी, इजरायल ने बेरूत में 22 मंजिला इमारत को निशाना बनाया गया.

दिल्ली-एनसीआर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम अचानक बदल गया है. ठंडी हवाएं, बादल और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान जताया है. गुरुवार और शुक्रवार के लिए येलो अलर्ट जारी है. तापमान 27 से 31 डिग्री के बीच रह सकता है और 21 मार्च के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा.

16 मार्च को वाराणसी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी मनाना कुछ मुस्लिम युवकों को महंगा पड़ गया. बीजेपी और हिंदूवादी संगठन का आरोप है कि, इन लोगों ने रोजा इफ्तार पार्टी करने के बाद गंगा नदी में बिरयानी और हड्डियां फेंक दीं. जैसे ही स्थानीय बीजेपी नेता की ओर से इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, पुलिस हरकत में आई और आनन फानन में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. अब संत समाज और बीजेपी इसे हिंदुओं के खिलाफ सोची समझी साजिश करार दे रहे हैं तो विपक्ष पूछ रहा है कि, गंगा में इफ्तार पार्टी करने से कौन सा कानून तोड़ा गया जो पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. सवाल है कि, ये कौन लोग हैं जिन्हें यूपी की अमन शांति रास नहीं आ रही.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण न कराकर अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया है. उनके इस कदम को बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. साथ ही, पार्टी के भीतर नई पीढ़ी के उभार और पुराने नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.






