
मेघालय विधानसभा चुनाव 2023: बीजेपी-कांग्रेस के सामने क्षत्रपों की ‘बड़ी चुनौती’
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मेघालय विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस, बीजेपी, टीएमसी, एनपीपी सहित सभी दल अकेले-अकेले किस्मत आजमा रहे हैं. बीजेपी खुद के दम पर सत्ता पर काबिज होना चाहती है तो कांग्रेस अपना खोया आधार वापस पाने की जुगत में है. एनपीपी सत्ता को बचाए रखने की जंग लड़ रही है तो टीएमसी कांग्रेस का विकल्प बनना चाहती है.
मेघालय विधानसभा चुनाव की 60 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान है. इन सीटों पर 375 उम्मीदवार चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. जनजातीय रिश्तों के समीकरण और 'डबल इंजन' सरकार का फॉर्मूला लेकर बीजेपी बैक सीट से सत्ता के फ्रंट सीट पर बैठने के लिए अकेले रणभूमि में उतरी है. कांग्रेस अपने सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रही है तो ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी राज्य में कांग्रेस का विकल्प बनने की जुगत में है. नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) जैसे क्षेत्रीय दल अपने सियासी आधार बचाए रखने और सत्ता की धुरी बनने के लिए जंग लड़ रहे हैं.
मेघालय में चतुष्कोणीय लड़ाई मेघालय की 60 सीटों के लिए 375 उम्मीदवार मैदान में हैं. एनपीपी 57 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस और बीजेपी ने 60-60 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. यूडीपी के 47 प्रत्याशी मैदान में हैं तो वीपीपी के 18 और एचएसडीपी के 11 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. टीएमसी ने 56 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं और मेघालय में सीएम पद का चेहरा मुकुल संगमा को बना रखा है, जो कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे. इस तरह से एनपीपी, बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी के बीच चतुष्कोणीय लड़ाई होती नजर आ रही है.
2018 के सियासी समीकरण साल 2018 में मेघालय में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. उस चुनाव में कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन सत्ता के सिंहासन तक नहीं पहुंच सकी थी. कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपी 19 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर थी. यूडीपी के 6, पीडीएफ 4, बीजेपी और एचएसपीडीपी को दो-दो सीट पर सफलता मिली थी. कांग्रेस को सत्ता से रोकने के लिए कोनराड संगमा ने बीजेपी, यूडीपी, पीडीएफ, एचपीपीडीपी और एक निर्दलीय के साथ मिलकर सरकार बनाई और वह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे.
5 साल में बदल गए समीकरण मेघालय का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है. कांग्रेस की सियासी जमीन पर टीएमसी खड़ी है और उसकी जगह लेने के लिए मशक्कत कर रही है तो दूसरी तरफ एनपीपी और बीजेपी का गठबंधन टूट चुका है. ऐसे में एक तरफ टीएमसी-यूडीपी हैं तो दूसरी तरफ एनपीपी, तीसरी तरफ बीजेपी है तो चौथे कोने पर कांग्रेस है. दिलचस्प बात ये है कि इस बार चुनाव में कोई भी दल किसी के साथ नहीं है बल्कि अपने-अपने दम पर चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में मुकाबला काफी रोचक हो गया है.
क्या सत्ता पर काबिज हो पाएगी बीजेपी? बीजेपी 75 फीसदी ईसाई आबादी वाले मेघालय में 60 में से तीन से ज्यादा सीटें नहीं जीती हैं. मौजूदा समय में उसके पास दो विधायक हैं और दोनों शिलॉन्ग से है. बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में 47 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसे इन्हीं दोनों सीट पर जीत मिली थी. हालांकि, सात सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे और 12 सीटों पर उसके प्रत्याशी तीसरे स्थान पर थे. बीजेपी का दावा है कि उसे इस बार 10-15 सीटें मिल सकती हैं. पार्टी की राज्य इकाई को कुछ मुद्दों पर अपने राष्ट्रीय रुख से पीछे हटने में भी कोई परहेज नहीं है. उदाहरण के तौर पर बीजेपी विधायक संबोर शुल्लई सार्वजनिक तौर पर लोगों को अधिक गोमांस खाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि मेघालय में गोमांस बड़ी संख्या में लोग खाते हैं.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार से मेघलाय के चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, जबकि पीएम मोदी 24 फरवरी को तुरा में रैली और शिलॉन्ग में रोड शो करेंगे. बीजेपी का साफ संदेश है कि पांच साल भले ही एनपीपी के साथ सरकार में रही हो, लेकिन अब सत्ता के फ्रंट सीट पर बैठने के लिए बैकफुट पर नहीं खेलगी. इसीलिए बीजेपी ने इस बार चुनाव में उम्मीदवारों का बड़ा रोस्टर तैयार किया है, जिसमें पांच बार के विधायक मार्टिन डैंगो है, जो एनपीपी छोड़कर आए हैं. संगमा की दक्षिण तुरा सीट पर बीजेपी ने पूर्व उग्रवादी नेता बर्नार्ड एन मारक को उतारा है.

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