
'मुझे इंसाफ चाहिए...', देहरादून में नस्लीय हिंसा के शिकार युवक के पिता का छलका दर्द
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देहरादून में नस्लीय हमले में मारे गए त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के पिता एक बीएसएफ जवान हैं. उन्होंने आरोपियों के लिए मौत की सज़ा की मांग की है. घटना के बाद नॉर्थ-ईस्ट छात्रों में गुस्सा है, प्रोटेस्ट हो रहे हैं और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे हैं.
उत्तराखंड के देहरादून में कथित नस्लीय हमले में मारे गए त्रिपुरा के स्टूडेंट एंजेल चकमा के दुखी पिता ने इंसाफ के लिए भावुक अपील की है. उन्होंने कहा कि किसी भी माता-पिता के सामने ऐसी मजबूरी नहीं आनी चाहिए कि वो अपना बच्चा इस तरह से खोए.
इंडिया टुडे से बात करते हुए, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान तरुण प्रसाद चकमा ने कहा कि आरोपियों को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा, "मेरा बच्चा चला गया. ऐसा किसी और के साथ नहीं होना चाहिए. हम बहुत दुखी हैं. हमारी बस यही गुजारिश है कि कोई और बच्चा इस तरह से न मरे."
तरुण चकमा ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, यह पहली ऐसी घटना है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले में स्थानीय लोग शामिल थे.
'मैं माफ कर देता लेकिन...'
दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे इंसाफ़ चाहिए. अगर मेरा बच्चा ज़िंदा होता, तो मैं आरोपियों को माफ़ कर देता लेकिन अब, उन सभी को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए. उन्हें फांसी दी जानी चाहिए.”
मृतक के पिता ने नस्लीय दुर्व्यवहार की भी कड़ी निंदा करते हुए कहा, "भारत जैसे विविध देश में यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. भारत के हर कोने से बच्चे पूरे देश में रहते हैं. ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए. नस्लीय टिप्पणियों का यह मामला पूरी तरह से गलत है. यह किसी के साथ नहीं होना चाहिए.”

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