
मुंबई बस हादसाः क्या ड्राइवर संजय मोरे ने बस को 'हथियार' के तौर पर किया इस्तेमाल? पुलिस करेगी जांच
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पुलिस को लग रहा है कि इस घातक दुर्घटना में शामिल बस के चालक संजय मोरे ने जानबूझकर इस कृत्य को अंजाम देने के लिए बस को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था. अदालत ने जांच को सुविधाजनक बनाने के लिए 54 वर्षीय बस चालक संजय मोरे को 21 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
मुंबई के कुर्ला इलाके में सोमवार रात हुए बस हादसे ने लोगों को दहला कर रख दिया. इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई और 42 लोग घायल हैं. अब मंगलवार को इस मामले में पुलिस ने कोर्ट को बताया कि हो सकता है कि इस घटना में वाहन चालक ने उस बस को किसी हथियार की तरह इस्तेमाल किया हो, इस एंगल से भी जांच करने की ज़रूरत है.
पीटीआई के मुताबिक, पुलिस को लग रहा है कि इस घातक दुर्घटना में शामिल बस के चालक संजय मोरे ने जानबूझकर इस कृत्य को अंजाम देने के लिए बस को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था. अदालत ने जांच को सुविधाजनक बनाने के लिए 54 वर्षीय बस चालक संजय मोरे को 21 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
यह घटना सोमवार को रात करीब 9.30 बजे मुंबई के कुर्ला इलाके में हुई थी. नागरिक संचालित बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) द्वारा संचालित बस ने घनी आबादी वाले इलाके में कई वाहनों और पैदल यात्रियों को टक्कर मार दी थी.
घटना के बाद ही बस ड्राइवर संजय मोरे को मौके पर ही हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) और 110 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास) के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप हैं.
अदालत की सुनवाई के दौरान, पुलिस ने तर्क दिया कि कथित अपराध गंभीर प्रकृति का था, जिसके लिए संजय मोरे के इरादों की गहन जांच की आवश्यकता थी. पुलिस ने यह निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया कि क्या बस को जानबूझकर लोगों की जान को खतरे में डालने के लिए लापरवाही से चलाया गया था?
पुलिस ने यह भी कहा कि वे जांच करेंगे कि क्या मोरे ने उचित प्रशिक्षण लिया था? क्या वह उस समय नशीले पदार्थों के प्रभाव में था? और क्या घटना के पीछे कोई साजिश थी? पुलिस ने उल्लेख किया कि परिवहन विभाग ने अभी तक दुर्घटना में शामिल बस की तकनीकी जांच नहीं की है. पुलिस ने यह साबित करने की ज़रुरत पर जोर दिया कि क्या संजय मोरे के पास बस होना भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्र में एक हथियार की तरह था.

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