
मानहानी मामले में राहुल गांधी को MP-MLA कोर्ट में पेश होने का आदेश, झारखंड हाईकोर्ट का फैसला
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मामला 2018 में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी द्वारा बीजेपी नेताओं पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है. बीजेपी नेता प्रताप कुमार कटियार ने उनकी टिप्पणी को मानहानि बताते हुए 9 जुलाई 2018 को चाईबासा सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. बाद में यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गय, जहां उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी की गई और पेशी का आदेश दिया गया. इसे राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की याचिका पर अहम सुनवाई हुई. यह याचिका उनके खिलाफ चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने के संबंध में दाखिल की गई थी. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 6 अगस्त को राहुल गांधी को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर वारंट को निरस्त करने की मांग की थी. उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही अदालत में पेशी से छूट के लिए अर्जी दी थी, जो अभी लंबित है. ऐसे में वारंट जारी किया जाना न्यायोचित नहीं है.
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 2018 में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने बीजेपी के नेताओं पर टिप्पणी की थी. बीजेपी नेता प्रताप कुमार कटियार ने उनकी टिप्पणियों को मानहानिपूर्ण बताते हुए 9 जुलाई 2018 को चाईबासा सीजेएम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था.
प्रताप कटियार के वकील केशव प्रसाद के मुताबिक, 28 मार्च 2018 को कांग्रेस के एक अधिवेशन में राहुल गांधी ने बीजेपी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था, जिसके कारण उनके वकील ने यह मामला दर्ज कराया.

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