
मादुरो तो बस बहाना, जिनपिंग असली निशाना... ट्रंप ने जंग छेड़ दी तो चीन के 60 अरब डॉलर का क्या होगा?
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लैटिन अमेरिका में ट्रंप और मादुरो की लड़ाई ग्लोबल क्रूड मार्केट में खलबली मचा सकती है. चीन ने वेनेजुएला को अरबों डॉलर का कर्ज इस भरोसे पर दिया है कि उसे इस लोन के बदले में कच्चे तेल की लगातार सप्लाई मिलती रहेगी. लेकिन अगर ये लड़ाई छिड़ जाती है तो सारा समीकरण ध्वस्त हो जाएगा. इसका असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ना तय है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल टैंकरों पर पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया है. इसका मतलब यह है कि वेनेजुएला के ऑयल शिप की कोई मूवमेंट नहीं हो पाएगी. अगर ये ऑयल शिप अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा में जाते हैं तो अमेरिका इन पर सैन्य कार्रवाई कर इन्हें जब्त कर सकता है. अमेरिका ऐसा कर भी चुका है.
वेनेजुएला और अमेरिका के बीच अगर टकराव आगे बढ़ता है तो इससे सबसे ज्यादा प्रभावित चीन होगा. चीन वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव युद्ध में बदलता है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को गंभीर चुनौतियां मिल सकती हैं. चीन वेनेजुएला से लगभग 600,000 से 650,000 बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल आयात करता है. ये आंकड़े दिसंबर 2025 के हैं.
वेनेजुएला चीन के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 4% हिस्सा सप्लाई करता है, जो वैश्विक स्तर पर कम लगता है, लेकिन भारी और सस्ते क्रूड की वजह से ये क्रूड ऑयल चीनी रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन अप्रत्यक्ष रूट्स से यह तेल खरीदता रहा है, जैसे कि मलेशियन लेबलिंग के जरिए.
वेनेजुएला और अमेरिकी की लड़ाई में फंसेगा चीन का तेल
इस वक्त 20 मिलियन बैरल से अधिक वेनेजुएलन तेल समंदर में फंसे हुए हैं. ये तेल अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं.
अगर ट्रंप वेनेजुएला के खिलाफ आगे बढ़ते हैं तो इस तेल का चीन तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा.

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