
महज 44 सेकेंड में हुई उमेश पाल की हत्या, भतीजी के सामने दौड़ाकर बदमाशों ने मारी गोली
AajTak
प्रयागराज शुक्रवार की रात गोलियों और बम के धमाके से दहल गया. बदमाशों ने राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उसके गनर की गोली मारकर हत्या कर दी. हत्या की इस पूरी वारदात को सिर्फ 44 सेकेंड में अंजाम दिया गया. उमेश पाल को उसकी भतीजी के सामने गोली मारी गई थी.
यूपी के प्रयागराज में शुक्रवार की रात को राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उसके गनर की बदमाशों ने गोली और बम मारकर हत्या कर दी. जांच के बाद सामने आया है कि हत्या की इस वारदात को सिर्फ 44 सेकेंड में अजाम दिया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक बेखौफ अपराधियों में से एक बदमाश पहले दुकान में बैठ कर उमेश पाल का इंतजार कर रहा था. उमेश पाल के गाड़ी से उतरते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरु कर दी.
बैकअप प्लान के साथ आए थे बदमाश
इतना ही नहीं बदमाशों ने पहले से ही बैकअप प्लान भी तैयार कर रखा था. उमेश पाल पर हमला करने के लिए बाइक और कार के साथ-साथ बदमाश पैदल भी आए थे. हमलावर कोर्ट से ही उनका पीछा कर रहे थे.
घटना के एक चश्मदीद ने बताया कि हमले के बाद उमेश पाल को गोली लग गई जिसके बाद वो अपने घर की तरफ भागने लगे. इस पर बदमाशों ने तंग गली में घुसकर फायरिंग की.
उमेश पाल का गनर संदीप निषाद भी घायल होने के बाद गली में भागा जिसको निशाना बनाते हुए बदमाशों ने गली में बम मार दिया. संदीप घायल अवस्था में घर के बाहर गिर पड़ा. इस पूरे वारदात को महज 44 सेकेंड के अंदर अंजाम दिया गया.

यूपी में जल जीवन मिशन में लापरवाही पर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. 12 जिलों के 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 को निलंबित किया गया, जबकि अन्य पर जांच, नोटिस और तबादले की कार्रवाई हुई है. खराब गुणवत्ता, धीमी प्रगति और शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घर नल योजना में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

कड़क है नॉर्थ बंगाल की चुनावी चाय! 54 सीटों में छुपा सत्ता का स्वाद, स्विंग वोटर्स करेंगे असली फैसला
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.

मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.










