
भागवत व धनखड़ के बोल: सवाल संविधान की सर्वोच्चता का है…
The Wire
संघ प्रमुख की मुसलमानों से अपना ‘श्रेष्ठताबोध’ छोड़ने को कहकर उनकी भारतीयता की शर्त तय करने की कोशिश हो या उपराष्ट्रपति की विधायिका का ‘श्रेष्ठताबोध’ जगाकर उसके व न्यायपालिका के बीच का संतुलन डगमगाने की, दोनों के निशाने पर देश का संविधान ही है.
क्या यह महज संयोग है कि आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहले हिंदुओं के एक हजार वर्ष से युद्ध में होने की बात कहते हुए हिंदुत्ववादी संगठनों की कट्टरताओं व उग्रताओं, दूसरे शब्दों में कहें तो हिंसाओं व आक्रामकताओं, को सही ठहराने के उस सिलसिले को, जो 2002 के गुजरात दंगों के वक्त से ही चला आ रहा है, नए सिरे से मजबूत किया। यह कहते हुए कि ‘पूर्वजों के पास वापस आना चाहते हैं, तो आएं’ मुसलमानों को कुछ इस अंदाज में अपने ‘श्रेष्ठताबोध’ से बाहर आने की सीख दी, जैसे न सिर्फ मुसलमानों बल्कि सारे गैर हिंदू समुदायों के देश (जो भागवत के अनुसार भारत से ज्यादा हिंदुस्तान है और इससे पहले वे मुसलमानों से अपने ‘स्वभाव’ में बदलाव की अपेक्षा भी कर चुके हैं.) में बिना भेदभाव, सबके बराबर व निर्भय होकर रहने की संवैधानिक गारंटी इस सीख को मानने की शर्त पर आधारित हो.
फिर उनके चहेते स्वयंसेवक उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में न्यायपालिका, खासकर सर्वोच्च न्यायालय को खुला संदेश दे डाला है कि वह ‘न्यायिक हस्तक्षेप’ के रास्ते विधायिका, खासतौर पर संसद, की ‘संप्रभुता’ को कमजोर करने से बाज आए?
आप चाहते हैं तो बेशक अनुमान लगाते रह सकते हैं, लेकिन इस सच्चाई का क्या करेंगे कि अब बात ऐसे अनुमानों से बहुत आगे बढ़ चली है और आरएसएस का शीर्ष नेतृत्व हो या देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन उसके स्वयंसेवक, कोई भी इस तरह के प्रयोगों को लेकर संदेह या अंदाज़े की गुंजाइश रखने या उनके पीछे छिपने की जरूरत नहीं समझता.
देश की सत्ता का संचालन कर रहे उसके स्वयंसेवकों ने जब से देश को उस दिशा में हांकने में सफलता पा ली है, जिसे देखकर कई हलकों में कहा जाने लगा है कि अब तो किसी दिन ढोल-नगाड़े बजाकर ‘हिंदू राष्ट्र’ की घोषणा भर कर देना बाकी है (भागवत खुद भी कह चुके हैं कि भारत तो हिंदू राष्ट्र है ही और इसके लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है.) ‘सैंयां भये कोतवाल, अब डर काहे का’ की मानसिकता से भरे उसके सारे प्रयोग पूरी तरह पारदर्शी हो गए हैं- एकदम खुल्लमखुल्ला.

महाराष्ट्र में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने बीपीसीएल और एचपीसीएल से स्वयं सहायता समूहों और केंद्रीय रसोईघरों के लिए सिलेंडरों की प्राथमिक आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि छात्रों के भोजन पर असर न पड़े.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने ‘प्रेस नोट 3’ के जरिए भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले देशों, मुख्य रूप से चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. यह नियम इन देशों से आने वाले स्वत: निवेश पर रोक लगाता था. विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 की शुरुआत से विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, की आपूर्ति में रुकावटों के कारण क़ीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके चलते एयर इंडिया समूह ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया है.

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. हालांकि सरकार ने देश में गैस की कमी से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति घबराहट में बढ़ी बुकिंग और वितरण बाधाओं से बनी है.






