
सत्तापक्ष द्वारा लोकसभा में विपक्ष के नेता की बढ़ती बेकद्री कई सवाल खड़े करती है
The Wire
नरेंद्र मोदी सरकार अपनी तीसरी पारी में भी विपक्ष को लेकर न सहज हो पाई है, न उससे लोकतांत्रिक ढंग से बरतना सीख पाई है. सीख पाती तो उसके उठाए सवालों का समुचित जवाब देती, न कि उन्हें उठाने का बुरा मानकर उसके नेता तक पर हमलावर हो जाती.
लोकतांत्रिक समाजवाद व बहुलवादी संप्रभुता के प्रबल समर्थक ब्रिटिश राजनीतिशास्त्री, सिद्धांतकार, दार्शनिक व विचारक प्रोफेसर हेराल्ड जोसेफ लास्की (जो एक समय अपने देश की लेबर पार्टी के अध्यक्ष भी रहे) ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘पार्लियामेंट्री गवर्नमेंट इन इंग्लैंड: ए कमेंट्री’ में लिखा है कि किसी भी लोकतंत्र की जीवंतता के लिए विपक्ष सर्वथा अनिवार्य है क्योंकि वह न सिर्फ उसका सुरक्षा कवच है, बल्कि सिर्फ वही सरकार की जवाबदेही व नागरिक स्वतंत्रताओं (जो वास्तविक स्वतंत्रता की परिचायक होती हैं) का संरक्षण सुनिश्चित कर सकता है.
लास्की का यह भी मानना है कि विपक्ष के अंकुश के बगैर सत्ता हमेशा विनाशकारी साबित होती है क्योंकि एकमात्र वही उसकी शक्तियों पर अंकुश लगाता व उसे तानाशाही की ओर जाने से रोकता है. वही सरकार की नीतियों की आलोचना करके समाज के विभिन्न वर्गों के हितों को सामने लाता और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करता है.
इतना ही नहीं, उसकी सक्रियता से जनता में ऐसी राजनीतिक चेतना जागृत होती है, जो लोकतंत्र की सफलता और जनहित के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है.
लास्की यहां तक कह गए हैं कि विपक्ष की अनिवार्यता के चलते ही हम यह मानने के बावजूद कि जो सरकार है, वह अपने जानें अच्छे से अच्छा कार्य कर रही है, ऐसे कानून बना रही है जो उसके विचार से देश के हित में हैं और संपूर्ण राज्य का शासन प्रबंध यथाशक्ति कुशलतापूर्वक कर रही है, हाउस ऑफ कॉमन्स (ब्रिटिश संसद के निचले सदन) के बहुत से (विपक्षी) सदस्यों को इस बात के लिए वेतन देते हैं कि वे सरकार के सार्वजनिक कार्यों में अधिक से अधिक बाधा डाल सकें.
साथ ही, उसकी गलतियों का अधिक से अधिक लाभ उठा व कह सकें कि वह देश को बरबाद किए दे रही है और उससे ऐसी सूचना ले सकें, जिससे इस बात को सिद्ध किया जा सके. इतना ही नहीं, वे (विपक्षी सदस्य) मतदाताओं में अपने इस नजरिए का प्रचार कर अपनी बातों को बुरे से भी बुरे ढंग से कह सके.
पुरानी आदत

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने ‘प्रेस नोट 3’ के जरिए भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले देशों, मुख्य रूप से चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. यह नियम इन देशों से आने वाले स्वत: निवेश पर रोक लगाता था. विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 की शुरुआत से विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, की आपूर्ति में रुकावटों के कारण क़ीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके चलते एयर इंडिया समूह ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया है.

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ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य में 54 सांप्रदायिक दंगे और सात मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. सबसे अधिक 24 सांप्रदायिक दंगे बालासोर ज़िले में दर्ज किए गए, जबकि 16 मामले खुर्दा ज़िले में सामने आए. हालांकि इन मामलों में 50 प्रतिशत से भी कम मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है.

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